डिजिटल लेनदेन पर मर्चेंट शुल्क को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। जहाँ विशेषज्ञ इसे तकनीक के लिए आवश्यक मान रहे हैं, वहीं दूसरे इसे उपभोक्ताओं पर बोझ बता रहे हैं।
- ₹2,000 तक के UPI और RuPay लेनदेन पूरी तरह कर-मुक्त रहेंगे।
- ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर 0.4% तक का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होगा।
- विशेषज्ञों के बीच इस शुल्क को 'टैक्स' बनाम 'सुविधा शुल्क' के रूप में लेकर मतभेद है।
भारत के डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। केंद्र सरकार की हालिया राजपत्र अधिसूचना (Gazette Notification) ने उच्च-मूल्य वाले डिजिटल लेनदेन पर मर्चेंट शुल्क को लेकर एक गंभीर बहस छेड़ दी है। नए नियमों के अनुसार, UPI और RuPay डेबिट कार्ड के माध्यम से ₹2,000 तक के सभी लेनदेन पूरी तरह से कर-मुक्त रहेंगे, लेकिन इस सीमा से ऊपर जाने पर व्यापारियों को 0.4% तक का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) देना होगा।
इस मुद्दे पर विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है। पूर्व भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के अध्यक्ष और वर्तमान मास्टरकार्ड इंडिया के अध्यक्ष रजनीश कुमार ने इस कदम का बचाव किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसे 'टैक्स' कहना गलत होगा। कुमार के अनुसार, यह एक 'फीस' है जो व्यापारियों द्वारा मिलने वाली सुविधा के लिए दी जाती है। उन्होंने तर्क दिया कि डिजिटल बुनियादी ढांचे, साइबर सुरक्षा और धोखाधड़ी रोकने के लिए भारी पूंजी की आवश्यकता होती है, जिसे लंबे समय तक सब्सिडी के माध्यम से नहीं चलाया जा सकता।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह निर्णय भारत के 'डिजिटल इंडिया' मिशन की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। यदि मर्चेंट शुल्क को पूरी तरह समाप्त रखा जाता है, तो बैंकिंग प्रणाली पर तकनीकी उन्नयन का भारी बोझ पड़ेगा। हालांकि, इसका दूसरा पहलू यह है कि क्या यह लागत अंततः आम जनता की जेब पर असर डालेगी।
यह कोई टैक्स नहीं है, बल्कि व्यापारियों द्वारा डिजिटल सुविधा के लिए दिया जाने वाला शुल्क है।
दूसरी ओर, पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल बिश्वजीत भट्टाचार्य ने इस पर चेतावनी दी है। उन्होंने तर्क दिया कि व्यापारी इस अतिरिक्त लागत का बोझ सीधे तौर पर उपभोक्ताओं पर डालेंगे। इससे यह प्रभावी रूप से एक 'डेस्टिनेशन-आधारित उपभोग कर' बन जाएगा। भट्टाचार्य का मानना है कि सरकार को भारत के डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए इसे सब्सिडी देना जारी रखना चाहिए ताकि इसकी पहुंच और विस्तार बना रहे।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) ने वित्तीय समावेशन में क्रांति ला दी है। पिछले कुछ वर्षों में, भारत ने दुनिया में सबसे अधिक डिजिटल लेनदेन का रिकॉर्ड बनाया है। शुरुआत में, सरकार ने डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए भारी सब्सिडी प्रदान की थी, लेकिन अब सिस्टम को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुल्क मॉडल की ओर कदम बढ़ाया जा रहा है।
Frequently Asked Questions
1. क्या ₹2,000 से कम के UPI भुगतान पर मुझे कोई शुल्क देना होगा?
नहीं, ₹2,000 तक के सभी UPI और RuPay डेबिट कार्ड लेनदेन पूरी तरह से कर-मुक्त और शुल्क-मुक्त हैं।
2. मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) क्या है?
MDR वह शुल्क है जो बैंक या पेमेंट गेटवे व्यापारियों से डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की सुविधा के बदले लेते हैं।