विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने सितंबर के शुरुआती 10 दिनों में भारतीय बाजार से ₹13,138 करोड़ की भारी बिकवाली की है। यह गिरावट अगस्त में आए निवेश का लगभग 44% हिस्सा है, जिससे बाजार में घबराहट बढ़ गई है।

  • FPI ने 10 ट्रेडिंग सत्रों में ₹13,138 करोड़ की बिकवाली की।
  • अगस्त के कुल निवेश का 44% हिस्सा मात्र 10 दिनों में निकाला गया।
  • 2026 के पहले 8 महीनों में कुल शुद्ध निकासी ₹2,37,579 करोड़ तक पहुंच गई।
  • रुपये की कमजोरी और ऊंचे मूल्यांकन ने विदेशी निवेशकों को हतोत्साहित किया।

भारतीय शेयर बाजार के लिए एक चिंताजनक संकेत सामने आया है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने इस महीने के पहले 10 ट्रेडिंग सत्रों में भारतीय इक्विटी शेयरों की ₹13,138 करोड़ की भारी बिकवाली की है। यह बिकवाली इतनी तीव्र है कि इसने अगस्त महीने में दर्ज किए गए ₹29,631 करोड़ के शुद्ध निवेश का लगभग 44% हिस्सा मात्र 10 दिनों में खत्म कर दिया है।

आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि 2026 के अधिकांश समय में FPI भारतीय बाजारों में शुद्ध विक्रेता बने रहे हैं। इस वर्ष के पहले आठ महीने और दस दिनों में बाजार से कुल शुद्ध निकासी (Net Outflow) ₹2,37,579 करोड़ तक पहुंच गई है, जो अब तक की सबसे बड़ी वार्षिक बिकवाली का रिकॉर्ड बना रही है।

बाजार की अस्थिरता के पीछे के कारण

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय शेयरों के ऊंचे मूल्यांकन (Valuations) और कॉर्पोरेट कमाई के बीच असंतुलन इस बिकवाली का मुख्य कारण है। इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट ने भी विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार के आकर्षण को कम कर दिया है।

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि विदेशी निवेशक अब सेकेंडरी मार्केट के बजाय प्राइमरी मार्केट (IPO) में अधिक रुचि दिखा रहे हैं। 12 सितंबर तक, FPI का प्राइमरी मार्केट में निवेश ₹1,336 करोड़ रहा, जिससे इस वर्ष का कुल प्राथमिक बाजार निवेश ₹47,183 करोड़ हो गया है।

जुलाई और अगस्त में सकारात्मक प्रवाह के बाद, अब FPI प्रवाह के फिर से नकारात्मक होने के संकेत मिल रहे हैं।

रुपये पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ा है। वैश्विक बॉन्ड यील्ड में वृद्धि और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण रुपया लगातार गिर रहा है। मंगलवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ₹95.88 पर बंद हुआ, जो पिछले सत्र के ₹95.54 से लगभग 30 पैसे नीचे है।

ऐतिहासिक संदर्भ

पिछले तीन वर्षों से, विदेशी निवेशक भारतीय इक्विटी में अपनी हिस्सेदारी कम कर रहे हैं। हालांकि जुलाई और अगस्त में कुछ समय के लिए निवेश में उछाल देखा गया था, लेकिन वर्तमान रुझान एक बड़े एग्जिट (Exit) की ओर इशारा कर रहे हैं, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था और मुद्रा स्थिरता के लिए चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।

Did You Know?: FPI निवेश में कमी सीधे तौर पर भारतीय रुपये की वैल्यू को कम करती है क्योंकि विदेशी निवेशक अपनी भारतीय संपत्ति बेचने के बाद डॉलर में वापस जाना चाहते हैं।

Frequently Asked Questions

1. FPI की बिकवाली का भारतीय बाजार पर क्या प्रभाव पड़ता है?
FPI की भारी बिकवाली से शेयर बाजार में गिरावट आती है और रुपये की कीमत कमजोर होती है।

2. क्या निवेशक अभी भी IPO में पैसा लगा रहे हैं?
हाँ, डेटा दिखाता है कि विदेशी निवेशक सेकेंडरी मार्केट के बजाय प्राइमरी मार्केट (IPO) में काफी रुचि दिखा रहे हैं।