कम्प्यूटर्लर और ऑडिटर जनरल की जांच में पता चला कि 2017‑18 से 2021‑22 के बीच ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड और भारत कोकिंग कोल लिमिटेड ने 66 मामलों में जनजातीय जमीन मालिकों को कम से कम रु 15.25 करोड़ कम भुगतान किया। यह रिपोर्ट सरकारी मानक मुआवजे से कई गुना निचले स्तर को उजागर करती है।
मुख्य बिंदु
- ईसीएल/बीसीसीएल ने 66 मामलों में कुल रु 15.25 करोड़ कम भुगतान किया।
- जनजातियों को एक एकड़ जमीन के लिए केवल ₹2.5‑12.6 लाख मिले, जबकि सरकारी दर ₹19.7‑125 लाख थी।
- राज्य स्तर के अधिकारी रिहैबिलिटेशन प्लान में शामिल नहीं हुए, जिससे पुनर्वास में गंभीर कमी रही।
आर्थिक नुकसान का विस्तार
कम्प्यूटर्लर और ऑडिटर जनरल (CAG) के ‘परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट’ में बताया गया है कि 2017‑18 से 2021‑22 के पाँच वित्तीय वर्षों में पश्चिम बंगाल में खनिज‑समृद्ध क्षेत्रों में ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) और भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) ने जनजातीय भूमि मालिकों को सरकारी मानक से बहुत कम मुआवजा दिया। केवल एक एकड़ जमीन के लिए भुगतान ₹2.5‑12.6 लाख रहा, जबकि सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम ₹19.7 लाख से लेकर अधिकतम ₹125 लाख तक का भुगतान होना चाहिए था।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत 1950 के शेड्यूल्ड ट्राइब्स आदेश में पश्चिम बंगाल के 40 जनजातियों को अनुसूचित जनजातियों की सूची में शामिल किया गया है। 2011 की जनगणना के अनुसार, राज्य में कुल जनसंख्या का 5.8 % एवं राष्ट्रीय जनजातीय जनसंख्या का 5.08 % इन जनजातियों का प्रतिनिधित्व करता है। इन समूहों में टोतो, बिरहोर और लोधा को विशेष रूप से ‘विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह’ (PVTG) घोषित किया गया है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the systematic undervaluation of tribal land not only breaches constitutional safeguards but also fuels social unrest in mineral‑rich districts, jeopardizing long‑term mining licenses and corporate reputation.
"जब सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मुआवजा नहीं दिया जाता, तो यह न केवल आर्थिक असमानता बढ़ाता है बल्कि सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांतों को भी ध्वस्त करता है," कहा गया है वित्तीय नीति विशेषज्ञ डॉ. अनीता गुप्ता ने।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या यह केस केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित है?
वर्तमान रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल के 66 मामलों का उल्लेख है, लेकिन समान पैटर्न अन्य खनन‑संकटग्रस्त राज्यों में भी देखा गया है।
सरकार ने इस मुद्दे पर क्या कदम उठाए हैं?
CAG की सिफारिशों के बाद राज्य सरकार ने पुनर्मूल्यांकन और पुनर्वास योजना पर पुनः विचार करने का संकेत दिया है, परंतु अभी तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है।