अमेरिकी संघीय व्यापार आयोग (FTC) और 22 राज्यों ने अमेज़न पर व्यवसायों से विज्ञापनों के लिए गुप्त रूप से अधिक शुल्क वसूलने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दायर किया है।
- FTC और 22 अमेरिकी राज्यों ने अमेज़न के खिलाफ विज्ञापन धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया।
- आरोप है कि अमेज़न ने 'सेकंड-प्राइस ऑक्शन' के नाम पर गुप्त रूप से अधिक पैसे वसूले।
- इस कथित योजना से 10 लाख से अधिक ब्रांड और विक्रेता प्रभावित हुए।
अमेरिकी संघीय व्यापार आयोग (FTC) और 22 राज्यों ने ई-कॉमर्स दिग्गज अमेज़न के खिलाफ एक व्यापक मुकदमा दायर किया है। इस कानूनी कार्रवाई में कंपनी पर आरोप लगाया गया है कि उसने पिछले सात वर्षों से अपने प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन देने वाले व्यवसायों से गुप्त रूप से अधिक शुल्क वसूला है। FTC का दावा है कि इस 'सीक्रेट सरचार्ज स्कीम' के जरिए अमेज़न ने अरबों डॉलर का अतिरिक्त राजस्व कमाया है।
मुकदमे के अनुसार, यह विवाद मुख्य रूप से अमेज़न के 'स्पॉन्सर्ड प्रोडक्ट्स', 'स्पॉन्सर्ड ब्रांड्स' और 'डिस्प्ले विज्ञापनों' के इर्द-गिर्द घूमता है। अमेज़न ने लगभग 5 लाख छोटे और मध्यम व्यवसायों को विश्वास दिलाया था कि वह एक 'सेकंड-प्राइस ऑक्शन' (Second-Price Auction) प्रणाली का उपयोग करता है। इस प्रणाली में, जीतने वाले विज्ञापनदाता को उसकी अपनी बोली के बजाय, दूसरे सबसे बड़े बोलीदाता से केवल एक सेंट अधिक भुगतान करना होता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल पैसों का नहीं, बल्कि डिजिटल बाजार में पारदर्शिता का है। जब एक प्लेटफॉर्म 'गेम मास्टर' और 'रेफरी' दोनों की भूमिका निभाता है, तो छोटे व्यवसायों के लिए निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा असंभव हो जाती है। यदि FTC के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह अमेज़न के विज्ञापन मॉडल की विश्वसनीयता पर एक बड़ा प्रहार होगा।
FTC का आरोप है कि 2019 से अमेज़न ने बिना किसी सूचना के सिस्टम में बदलाव किया और एक 'सॉफ्ट रिजर्व प्राइस' (Soft Reserve Price) पेश किया। शिकायत में कहा गया है कि अमेज़न ने एक 'काल्पनिक नीलामी प्रतिभागी' (Invented Auction Participant) का उपयोग किया, जो मूल रूप से एक फर्जी बोली लगाने वाला था। इसका उद्देश्य कीमतों को कृत्रिम रूप से बढ़ाना था ताकि विज्ञापनदाता अपनी पूरी बोली का भुगतान करें।
डिजिटल विज्ञापन बाजारों में इस तरह की 'शिल बिडिंग' (Shill Bidding) न केवल अनैतिक है, बल्कि यह मुक्त बाजार के सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है।
अमेज़न ने इन आरोपों को 'भ्रामक' बताया है। कंपनी का तर्क है कि FTC विज्ञापन प्रणालियों के काम करने के तरीके को नहीं समझता है। अमेज़न का कहना है कि उसके ऑक्शन सिस्टम में अरबों बोलियों का मूल्यांकन होता है, जिससे कीमतें स्वाभाविक रूप से बदलती रहती हैं और विज्ञापनदाताओं को पूरी जानकारी दी जाती है।
| प्रचारित प्रणाली (Promised) | कथित वास्तविक प्रणाली (Alleged) |
|---|---|
| सेकंड-प्राइस ऑक्शन (कम लागत) | फर्स्ट-प्राइस ऑक्शन (अधिक लागत) |
| प्रतिस्पर्धी बोली + 1 सेंट | पूरी जीतने वाली बोली (80% मामलों में) |
| पारदर्शी बोली प्रक्रिया | गुप्त 'सॉफ्ट रिजर्व' और फर्जी बोलीदाता |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: सेकंड-प्राइस ऑक्शन क्या है?
यह एक ऐसी नीलामी है जहाँ विजेता को अपनी बोली के बजाय दूसरे सबसे ऊंचे बोलीदाता की कीमत से थोड़ा अधिक भुगतान करना होता है।
प्रश्न 2: इस मामले में कौन से राज्य शामिल हैं?
कैलिफोर्निया, न्यूयॉर्क, फ्लोरिडा और वाशिंगटन सहित कुल 22 अमेरिकी राज्य FTC के साथ इस मुकदमे में शामिल हैं।