केरल राज्य उपभोक्ता आयोग ने एक ऑटोमोबाइल कंपनी को कार के कम माइलेज के कारण ग्राहक को ₹75,000 का मुआवजा देने का आदेश दिया है। कंपनी ने 18.5 किमी/लीटर का वादा किया था, लेकिन कार केवल 8-10 किमी/लीटर का माइलेज दे रही थी।

  • कार निर्माता ने 18.5 किमी/लीटर का माइलेज देने का वादा किया था।
  • वास्तविक माइलेज केवल 8 से 10 किमी/लीटर के बीच पाया गया।
  • आयोग ने इसे 'सेवा में कमी' (Deficiency in Service) माना।
  • ग्राहक को ₹75,000 का मुआवजा देने का आदेश दिया गया।

केरल राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए एक ऑटोमोबाइल कंपनी को ग्राहक को ₹75,000 का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। यह मामला कार की माइलेज के वादे और वास्तविक प्रदर्शन के बीच भारी अंतर से संबंधित है।

मामले की पृष्ठभूमि

विवाद की शुरुआत 23 जनवरी, 2015 को हुई थी, जब शिकायतकर्ता ने एक कार खरीदी थी। डीलर ने आश्वासन दिया था कि यह कार 18.5 किमी प्रति लीटर का औसत माइलेज देगी। हालांकि, कार खरीदने के कुछ समय बाद ही ग्राहक ने शिकायत की कि वाहन केवल 5 किमी प्रति लीटर का माइलेज दे रहा है, जिसे उसने 'मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट' (विनिर्माण दोष) बताया।

जांच और विशेषज्ञ रिपोर्ट

मामले की सुनवाई के दौरान, डीलर ने स्वीकार किया कि परीक्षण के दौरान कार का माइलेज केवल 8 से 10 किमी प्रति लीटर ही पाया गया। हालांकि, कंपनी ने तर्क दिया कि माइलेज सड़क की स्थिति, ईंधन की गुणवत्ता और ड्राइविंग आदतों पर निर्भर करता है। ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) की विशेषज्ञ रिपोर्ट में पाया गया कि कार का वास्तविक माइलेज 13.2 किमी प्रति लीटर था।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला ऑटोमोबाइल क्षेत्र में उपभोक्ता अधिकारों की मजबूती को दर्शाता है। भले ही तकनीकी रूप से 'विनिर्माण दोष' साबित करना कठिन हो, लेकिन यदि कोई उत्पाद अपने विज्ञापित मानकों को पूरा करने में विफल रहता है, तो इसे कानूनी रूप से 'सेवा में कमी' माना जा सकता है।

यदि कोई कंपनी विशिष्ट प्रदर्शन मानक का वादा करती है और उसे पूरा करने में विफल रहती है, तो वह उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत उत्तरदायी है।

आयोग ने पाया कि हालांकि कार में कोई बड़ा विनिर्माण दोष नहीं था, लेकिन वादा किए गए माइलेज को प्राप्त करने में विफल रहना स्पष्ट रूप से सेवा में कमी (Deficiency in Service) है। जिला आयोग ने पहले कार बदलने या ₹7.27 लाख वापस करने का आदेश दिया था, लेकिन राज्य आयोग ने इसे संशोधित करते हुए ₹75,000 का मुआवजा तय किया क्योंकि कार ग्राहक के पास ही थी।

Did You Know?: भारत में उपभोक्ता अपनी शिकायतों के लिए राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1915 पर कॉल कर सकते हैं।

Frequently Asked Questions

1. क्या कम माइलेज के लिए कार निर्माता को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है?
हाँ, यदि कंपनी ने एक विशिष्ट माइलेज का वादा किया है और वह उसे पूरा करने में विफल रहती है, तो इसे सेवा में कमी माना जा सकता है।

2. क्या इसके लिए 'मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट' साबित करना जरूरी है?
नहीं, इस मामले में आयोग ने स्पष्ट किया कि भले ही विनिर्माण दोष साबित न हो, लेकिन वादे के मुताबिक प्रदर्शन न करना भी मुआवजे का आधार है।