मंगलुरु पुलिस कमिश्नर ने 'ऑपरेशन राइज' के तहत छात्रों से नशीली दवाओं की तस्करी रोकने में सहयोग करने का आह्वान किया है। पुलिस ने नशा करने वालों के बजाय सूचना देने वालों और सुधार चाहने वालों पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही है।

मुख्य बातें

  • पुलिस कमिश्नर ने छात्रों से ड्रग पेडलर्स की गुप्त सूचना देने की अपील की।
  • 'ऑपरेशन राइज' और 'बेडा ब्रो' का उद्देश्य शैक्षणिक परिसरों को नशा मुक्त बनाना है।
  • नाबालिगों को नशा देने वालों को उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।
  • पुलिस 112 नंबर और QR कोड के माध्यम से सूचनाएं स्वीकार कर रही है।

मंगलुरु: मंगलुरु के पुलिस कमिश्नर सुधीर कुमार रेड्डी ने हाल ही में फादर मुल्लर कन्वेंशन सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान छात्रों को नशीली दवाओं के बढ़ते खतरे के प्रति सचेत किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक छात्रों के बीच नशे की मांग बनी रहेगी, तब तक पुलिस के लिए इसकी आपूर्ति को पूरी तरह रोकना चुनौतीपूर्ण होगा।

कमिश्नर रेड्डी ने 'ऑपरेशन राइज' और 'बेडा ब्रो' कार्यक्रमों के माध्यम से पुलिस की सक्रियता पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे न केवल नशे से दूर रहें, बल्कि नशा बेचने वालों के खिलाफ पुलिस का साथ भी दें। उन्होंने बताया कि छात्र पोस्टर पर दिए गए QR कोड को स्कैन कर सकते हैं या 112 पर कॉल करके गुमनाम रूप से जानकारी साझा कर सकते हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि शैक्षणिक संस्थानों को नशा मुक्त बनाना केवल कानून प्रवर्तन का कार्य नहीं है, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी है। यदि छात्र सक्रिय रूप से सूचना तंत्र का हिस्सा बनते हैं, तो पुलिस की पहुंच उन छिपे हुए नेटवर्क तक आसान हो जाएगी जो शिक्षण संस्थानों के आसपास सक्रिय हैं।

'जब तक मांग है, तब तक आपूर्ति बनी रहेगी; छात्रों को इस चक्र को तोड़ना होगा।'

कानूनी कड़ाई की बात करते हुए, कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 168 के तहत पुलिस को छात्रों की ड्रग टेस्टिंग करने का अधिकार है। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी नाबालिग को नशीली दवाएं देने वाले को 7 साल की जेल हो सकती है, जबकि नाबालिगों को नशा बेचने वालों को आजीवन कारावास तक की सजा दी जा सकती है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

दक्षिण कन्नड़ क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में नशीली दवाओं के बढ़ते मामलों ने प्रशासन को अत्यधिक सतर्क कर दिया है। इसी कारण से पुलिस ने अब केवल छापेमारी तक सीमित न रहकर 'ऑपरेशन राइज' जैसे सामुदायिक कार्यक्रमों की शुरुआत की है, ताकि समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग यानी युवाओं को इस दलदल से बचाया जा सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. क्या सूचना देने वाले की पहचान गुप्त रखी जाएगी?
हाँ, पुलिस ने आश्वासन दिया है कि 112 या QR कोड के माध्यम से दी गई जानकारी पूरी तरह से गुमनाम रहेगी।

2. क्या पुलिस छात्रों की ड्रग टेस्टिंग कर सकती है?
हाँ, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत पुलिस के पास संदिग्ध परिस्थितियों में ड्रग टेस्ट करने का कानूनी अधिकार है।

क्या आप जानते हैं?: पुलिस न केवल अपराधियों पर कार्रवाई करती है, बल्कि नशे के आदी छात्रों को पुनर्वास और सुधार के लिए आवश्यक सहायता भी प्रदान करती है।