चेन्नई पुलिस ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) टेंडर के नाम पर एक व्यवसायी से 12.7 लाख रुपये ठगने के मामले में तेलंगाना के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने सुरक्षा जमा के नाम पर धोखाधड़ी की थी।
मुख्य बातें
- चेन्नई के व्यवसायी से ₹12.7 लाख की ऑनलाइन धोखाधड़ी।
- इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के फर्जी टेंडर का झांसा दिया गया।
- तेलंगाना के मोइनबाद से आरोपी मोहिलिकिट्टा महेश को किया गया गिरफ्तार।
- आरोपी ने कमीशन के रूप में ₹2.75 लाख कमाए थे।
चेन्नई: ग्रेटर चेन्नई पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए तेलंगाना के एक 33 वर्षीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के एक फर्जी टेंडर के माध्यम से चेन्नई के एक व्यवसायी से ₹12.70 लाख की धोखाधड़ी करने के संबंध में की गई है।
घटनाक्रम के अनुसार, चेन्नई के वनागरम निवासी व्यवसायी जयंती बाबू को मार्च 2026 में एक अज्ञात व्यक्ति ने संपर्क किया था। जालसाज ने दावा किया कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ₹4 करोड़ का एक टेंडर निकाल रहा है, जिसमें ऑटोमैटिक दरवाजे लगाने का काम शामिल है। टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने के लिए 'सुरक्षा जमा' (Security Deposit) के नाम पर जालसाज ने पीड़ित को विश्वास में लिया और पैसे ट्रांसफर करने के लिए राजी कर लिया।
धोखाधड़ी का तरीका
पीड़ित ने झांसे में आकर विभिन्न लेनदेन के माध्यम से कुल ₹12.70 लाख आरोपी द्वारा दिए गए बैंक खाते में स्थानांतरित कर दिए। जैसे ही पैसा प्राप्त हुआ, जालसाज ने सभी संचार बंद कर दिए। मामला दर्ज होने के बाद, वेस्ट ज़ोन साइबर क्राइम पुलिस ने जांच शुरू की और संदिग्ध एसबीआई खाते का पता लगाया, जो तेलंगाना के मोइनबाद निवासी मोहिलिकिट्टा महेश के नाम पर था।
साइबर अपराधी अक्सर सरकारी टेंडरों की आड़ लेकर बड़े व्यवसायों को निशाना बनाते हैं, जिससे बचना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
BozokMedia विश्लेषण: यह क्यों मायने रखता है?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला दर्शाता है कि कैसे साइबर अपराधी अब केवल व्यक्तिगत डेटा ही नहीं, बल्कि कॉर्पोरेट टेंडरिंग प्रक्रियाओं का उपयोग करके बड़े वित्तीय अपराध कर रहे हैं। यह घटना व्यवसायों के लिए एक चेतावनी है कि वे किसी भी टेंडर प्रक्रिया में धन हस्तांतरण करने से पहले आधिकारिक चैनलों के माध्यम से सत्यापन अवश्य करें।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में पिछले कुछ वर्षों में 'टेंडर फ्रॉड' के मामलों में भारी वृद्धि देखी गई है। अपराधी अक्सर प्रतिष्ठित सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) के नाम का उपयोग करते हैं ताकि विश्वसनीयता बनाई जा सके। पुलिस अब अंतर-राज्यीय साइबर अपराधों से निपटने के लिए विशेष टीमों का गठन कर रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. क्या यह टेंडर असली था?
नहीं, यह पूरी तरह से एक फर्जी टेंडर था जिसे केवल पैसे ऐंठने के लिए बनाया गया था।
2. पुलिस ने क्या बरामद किया है?
पुलिस ने आरोपी के पास से एक मोबाइल फोन और धोखाधड़ी से प्राप्त धन के सबूत बरामद किए हैं।