उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने एसएससी भर्ती परीक्षा में हाईटेक नकल कराने वाले गिरोह के मुख्य आरोपी लोकेश को अलवर से गिरफ्तार किया है। आरोपी के घर से 92 मॉडिफाइड TFT स्क्रीन और अन्य हाईटेक उपकरण बरामद हुए हैं जो जैमर को चकमा देने में सक्षम थे।

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मुख्य बातें

  • एसटीएफ ने राजस्थान के अलवर से SSC भर्ती घोटाले का आरोपी लोकेश गिरफ्तार किया।
  • आरोपी के पास से 92 मॉडिफाइड TFT स्क्रीन और दर्जनों इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिले।
  • यह तकनीक वाई-फाई के जरिए परीक्षा केंद्र की स्क्रीन को बाहर लाइव स्ट्रीम करती थी।
  • यह हाईटेक उपकरण परीक्षा केंद्रों में लगे जैमर को भी चकमा देने में सक्षम थे।

उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एसएससी (SSC) भर्ती परीक्षा में हाईटेक तरीके से नकल कराने वाले बड़े गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए एक और महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। एसटीएफ ने राजस्थान के अलवर से फरार आरोपी लोकेश को गिरफ्तार किया है। जांच में पता चला है कि लोकेश इस पूरे नेटवर्क का वह महत्वपूर्ण हिस्सा था जो परीक्षा केंद्रों में इस्तेमाल होने वाली विशेष 'मॉडिफाइड TFT स्क्रीन' की आपूर्ति करता था।

हाईटेक उपकरणों का बड़ा जखीरा बरामद

गिरफ्तारी के बाद जब एसटीएफ ने लोकेश के ठिकानों पर छापेमारी की, तो वहां से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का एक विशाल भंडार मिला। बरामद सामानों की सूची चौंकाने वाली है, जिसमें 92 मॉडिफाइड TFT स्क्रीन, 45 VGA कार्ड, 20 VGA-to-HDMI कार्ड, 14 रास्पबेरी पाई डिवाइस और कई अन्य नेटवर्किंग उपकरण शामिल हैं। ये उपकरण इतने उन्नत थे कि इनसे परीक्षा की लाइव स्ट्रीमिंग की जा सकती थी।

कैसे काम करता था यह नकल का जाल?

बोजोकमीडिया (BozokMedia) विश्लेषण से पता चलता है कि यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम कर रहा था। आरोपी लोकेश ने कंप्यूटर हार्डवेयर में विशेषज्ञता हासिल की थी और उसने ऐसी स्क्रीन विकसित की थीं जो बाहर से बिल्कुल सामान्य कंप्यूटर मॉनिटर जैसी दिखती थीं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की तकनीक का उपयोग परीक्षा की शुचिता को पूरी तरह से खत्म कर देता है।

इन मॉडिफाइड स्क्रीन को वाई-फाई डोंगल और विशेष राउटर के माध्यम से जोड़ा जाता था, जिससे परीक्षा केंद्र के कंप्यूटर की स्क्रीन को बाहर बैठे 'सॉल्वर' को लाइव दिखाया जा सके। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ये उपकरण परीक्षा केंद्रों में लगाए गए जैमर के प्रभाव से भी सुरक्षित रहते थे, जिससे यह घोटाला लंबे समय तक पकड़ा नहीं गया।

Why This Matters

यह मामला देश की सबसे प्रतिष्ठित भर्ती परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। यदि जैमर जैसी सुरक्षा तकनीक भी फेल हो रही है, तो भविष्य में परीक्षाओं को सुरक्षित रखने के लिए और अधिक उन्नत साइबर सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है।

क्या आप जानते हैं?: एक मॉडिफाइड TFT स्क्रीन तैयार करने में आरोपी को लगभग 40 हजार रुपये का खर्च आता था, जिस पर वह 5 हजार रुपये प्रति स्क्रीन का मुनाफा कमाता था।

Frequently Asked Questions

1. यह गिरोह किस परीक्षा में नकल करा रहा था?
यह गिरोह मुख्य रूप से SSC द्वारा आयोजित CAPF, SSF कांस्टेबल और असम राइफल्स राइफलमैन भर्ती परीक्षा-2026 में शामिल था।

2. जैमर इन उपकरणों को क्यों नहीं रोक पा रहे थे?
गिरोह विशेष प्रकार के वाई-फाई और नेटवर्किंग उपकरणों का उपयोग कर रहा था जो पारंपरिक जैमर की फ्रीक्वेंसी को चकमा देने में सक्षम थे।