नई दिल्ली में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने मानवाधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज़, आईपीएस अधिकारी अरविंद नेगी और चार अन्य को आतंकवादी वित्तपोषण के आरोप में अभियोग पत्र जारी किया। यह मामला 2021 के राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के केस से जुड़ा है।

मुख्य बिंदु

  • परवेज़ को UAPA और पीसी एक्ट के तहत संगठित साजिश का आरोप
  • नेगी पर आधिकारिक रहस्य अधिनियम के तहत लीक के आरोप
  • एक सहयोगी को रिहा कर दिया गया, जबकि पाँच अन्य को गिरफ्तार किया गया

नई दिल्ली— अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने 31 जुलाई को खुर्रम परवेज़, अरविंद नेगी और चार अन्य व्यक्तियों के खिलाफ आतंकवादी फंडिंग से संबंधित कई गंभीर आरोप लगाते हुए अभियोग पत्र जारी किया। यह कार्रवाई राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा 2021 में दायर केस के तहत की गई।

परवेज़, जो जम्मू‑कश्मीर सिविल सोसाइटी गठबंधन (JKCCS) के समन्वयक रहे हैं, को भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत साजिश और राज्य के विरुद्ध युद्ध का आरोप लगाया गया है। साथ ही, उन्होंने उन्नत अवैध गतिविधियों रोकथाम अधिनियम (UAPA) और भ्रष्टाचार रोकथाम (PC) अधिनियम के तहत भी दंडनीय कार्यवाही का सामना किया।

हिमाचल प्रदेश से आईपीएस अधिकारी अरविंद नेगी पर आधिकारिक रहस्य अधिनियम के तहत जानकारी लीक करने और PC अधिनियम के तहत रिश्वत स्वीकार करने का आरोप है। नेगी ने 2020 में एक जांच रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज़ लीक कर एक लेख़-ए‑तक़दीर (LeT) कार्यकर्ता को मदद की थी, जैसा कि अभियोग में बताया गया है।

वहीं, अन्य चार आरोपी—अर्शिद अहमद टॉन्च, ज़फ़र अली, रम्भावन प्रसाद और चंदन महतो—पर भी UAPA, IPC और PC एक्ट के तहत विभिन्न आरोप तय किए गए हैं, जिनमें दस्तावेज़ जालसाज़ी और सिम कार्ड व बैंक खाता खोलने के लिए फर्जी पहचान बनाना शामिल है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the indictment underscores a broader governmental push to curb alleged foreign‑backed activism in Jammu‑Kashmir, raising concerns about the balance between national security and civil liberties.

"ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता ही लोकतंत्र की रक्षा करती है," कहते हैं मानवाधिकार वकील अनीता सिंह।
Did You Know?: खुर्रम परवेज़ को 2022 में एक साल पहले ही जेल से रिहा किया गया था, जिसने उनके मानवाधिकार कार्य को और अधिक प्रमुख बना दिया।

Frequently Asked Questions

  • क्या यह केस केवल जम्मू‑कश्मीर तक सीमित है? नहीं, इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के कई स्तर शामिल हैं और यह पूरे भारत में संभावित प्रभाव डाल सकता है।
  • क्या आरोपों के आधार पर सजा तय हो चुकी है? अभी तक कोई अंतिम सजा नहीं दी गई; मामला अभी परीक्षण चरण में है।