सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि घरेलू क्रूरता का अपराध केवल वैवाहिक रिश्तों तक सीमित नहीं, बल्कि लिव‑इन संबंधों में भी लागू होगा, जिससे महिलाओं को समान कानूनी सुरक्षा मिलेगी। यह निर्णय आधुनिक शहरी जीवन की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करता है।

मुख्य बिंदु

  • 498A अब लिव‑इन रिश्तों में भी लागू होगा
  • न्यायालय ने महिलाओं को ‘पत्नी’ की ही सुरक्षा देने का आदेश दिया
  • सुधार का उद्देश्य आधुनिक सामाजिक संरचना के साथ कानून को संरेखित करना है

न्यायालय का मुख्य आदेश

नई दिल्ली के सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 3 अगस्त 2026 को यह स्पष्ट किया कि भारतीय दंड संहिता की धारा 498A (अब भारतीय न्याय संहिता की धारा 85‑86) केवल वैवाहिक संबंधों तक सीमित नहीं रहेगी। न्यायालय ने इस धारा को "विवाह के स्वरूप के रिश्ते" तक विस्तारित किया, जिसमें लिव‑इन रिश्ते भी शामिल हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पहले, 498A धारा केवल वैवाहिक जीवन में महिला के प्रति क्रूरता को रोकने के लिए बनाई गई थी। 2005 में इस धारा को कई विवादों का सामना करना पड़ा, जिसमें दुरुपयोग और झूठी शिकायतों की संभावनाएँ शामिल थीं। समय के साथ सामाजिक संरचनाएँ बदल गईं, और लिव‑इन रिश्ते शहरी भारत में प्रचलित हो गए। यह निर्णय उन बदलावों को कानूनी रूप से मान्यता देता है।

सभी रिश्तों में समान सुरक्षा

न्यायधीश संजय करोल ने कहा, "क्रूरता दरवाज़े पर नहीं देखती कि वह घर शादीशुदा महिला का है या नहीं।" कोर्ट ने यह तर्क दिया कि रिश्ते चाहे वैवाहिक हों या लिव‑इन, यदि उनका उद्देश्य शादी जैसा हो, तो उन्हें वही सुरक्षा मिलनी चाहिए।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that this landmark ruling bridges the gap between traditional legal frameworks and contemporary relationship dynamics, potentially reducing legal ambiguities for millions of cohabiting couples across India.

"लिव‑इन रिश्तों में महिलाओं को समान सुरक्षा देना सामाजिक समता की ओर एक बड़ा कदम है," प्रोफेसर अनीता सिंह, सामाजिक विज्ञान विशेषज्ञ ने कहा।

भविष्य की दिशा

यह निर्णय न केवल महिलाओं के अधिकारों को सुदृढ़ करेगा, बल्कि अन्य नागरिक अधिकारों के विस्तार के लिए एक मिसाल स्थापित करेगा। विधायी संस्थाओं को अब इस परिवर्तन को अन्य संबंधित कानूनों में भी प्रतिबिंबित करने की आवश्यकता होगी।

क्या आप जानते हैं?: भारत में लिव‑इन रिश्तों की कानूनी मान्यता 2015 के बाद से धीरे‑धीरे बढ़ रही है, लेकिन यह अभी भी कई राज्यों में सामाजिक विवाद का कारण है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या 498A के तहत अब लिव‑इन साथी भी आरोपी बन सकते हैं?

उत्तर: हाँ, यदि अदालत यह निर्धारित करती है कि संबंध वैवाहिक के समान है और उसमें घरेलू क्रूरता का मामला है।

प्रश्न 2: यह निर्णय महिलाओं को किस प्रकार की सुरक्षा प्रदान करता है?

उत्तर: यह उन्हें वैवाहिक जीवन में मिलने वाली कानूनी सुरक्षा, जैसे कि तत्काल राहत, जेल की सजा, और आर्थिक समर्थन, प्रदान करता है।