बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2013 के यौन हमला मामले में पूर्व टेहेल्का संपादक टारुन तेजपाल को दण्डित किया और सत्र अदालत के बरी करने के आदेश को रद्द कर दिया। गोवा बेंच ने दोपहर में सजा सुनाने का आदेश दिया, जबकि सॉलिसिटर जनरल ने ‘नो मीन्स नो’ का संदेश देने के लिये अधिकतम सजा की मांग की।

मुख्य बिंदु

  • टारुन तेजपाल को 376 (2)(f), 354(a), 354(b) के तहत दोषी ठहराया गया
  • न्यूनतम सजा 10 साल, अधिकतम सजा आजीवन कारावास
  • गोवा बेंच ने दोपहर में सजा सुनाने का आदेश दिया

बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार, 6 अगस्त 2026 को पूर्व टेहेल्का संपादक टारुन तेजपाल को 2013 के यौन हमला मामले में दण्डित किया और सत्र अदालत के बरी करने के आदेश को रद्द कर दिया। यह फैसला गोवा बेंच के न्यायाधीश नीला गोखले और अमित जामसंदेकर द्वारा सुनाया गया।

तेजपाल को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (2)(f) (विश्वास या अधिकार के पद पर रहने वाले द्वारा बलात्कार), 354(a) (यौन उत्पीड़न) और 354(b) (महिला को वस्त्र उतारने के इरादे से बल प्रयोग) के तहत दोषी पाया गया। धारा 376 के तहत न्यूनतम सजा 10 साल और अधिकतम सजा आजीवन कारावास है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, जो गोवा सरकार के पक्ष में उपस्थित थे, ने ‘नो मीन्स नो’ संदेश को मजबूत करने के लिये अधिकतम सजा की मांग की। तेजपाल ने न्यूनतम सजा की माँग की, यह कहते हुए कि वह ‘राजनीतिक शिकार’ और दो बेटियों का पिता है।

यह मामला 2013 में गोवा के थिंकफ़ेस्ट कार्यक्रम के दौरान एक होटल एलीवेटर में एक जूनियर सहयोगी द्वारा लगाए गए यौन हमला आरोपों पर आधारित है। 2021 में ट्रायल कोर्ट ने तेजपाल को बरी कर दिया था, लेकिन गोवा सरकार ने उस फैसले को चुनौती दी।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

टेहेल्का के संस्थापक और पूर्व संपादक तेजपाल को पहले भी कई यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना करना पड़ा था, जिससे भारतीय मीडिया में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मुद्दे पर व्यापक चर्चा हुई। इस फैसले से न्याय प्रणाली में लैंगिक अपराधों के प्रति सख्त रुख का संकेत मिलता है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that इस निर्णय से न केवल मीडिया में शक्ति संरचनाओं का पुनर्मूल्यांकन होगा, बल्कि भविष्य में यौन अपराधियों को कड़ी सजा मिलने की संभावना भी बढ़ेगी, जिससे सामाजिक संदेश ‘नो मीन्स नो’ को सुदृढ़ किया जाएगा।

"साक्ष्य‑आधारित न्याय प्रणाली ही यौन अपराधों को रोकने की कुंजी है," कहा कानूनी विशेषज्ञ ने।
Did You Know?: 2013 के इस मामले में पहली बार एक हाई कोर्ट ने सत्र अदालत के बरी करने के आदेश को उलटा।
धारान्यूनतम सजाअधिकतम सजा
376 (2)(f)10 सालजीवन कारावास

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या टारुन तेजपाल को तुरंत सजा सुनाई जाएगी?
उत्तर: गोवा बेंच ने दोपहर में सजा सुनाने का आदेश दिया है, लेकिन आधिकारिक आदेश अभी जारी होना बाकी है।

प्रश्न 2: इस फैसले का मीडिया उद्योग पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर: यह फैसला मीडिया में शक्ति के दुरुपयोग को रोकने और महिलाओं के खिलाफ अपराधों के लिए कड़ी सजा की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।