केरल पुलिस ने तिरुवनंतपुरम में एक हाई-टेक कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है जो अमेरिकी नागरिकों को फर्जी लोन ऐप के जरिए निशाना बना रहा था। इस अंतरराष्ट्रीय गिरोह के मास्टरमाइंड की तलाश जारी है।
मुख्य बातें
- तिरुवनंतपुरम में एक फर्जी आईटी कंपनी के रूप में चल रहे कॉल सेंटर का भंडाफोड़।
- मुख्य रूप से अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाया गया; 13 आरोपी गिरफ्तार।
- मास्टरमाइंड आकाशदीप चौधरी फरार, पुलिस ने लुकआउट नोटिस जारी किया।
- गिरोह रात भर काम करता था ताकि अमेरिकी समय क्षेत्र के साथ तालमेल बिठा सके।
केरल की पुलिस ने एक बेहद परिष्कृत अंतरराष्ट्रीय लोन ऐप रैकेट का पर्दाफाश किया है, जो तिरुवनंतपुरम के श्रीकरयम में एक अस्थायी कॉल सेंटर के माध्यम से संचालित हो रहा था। तिरुवनंतपुरम सिटी पुलिस ने इस मामले में जांच तेज कर दी है, क्योंकि यह गिरोह मुख्य रूप से विदेशी नागरिकों, विशेष रूप से अमेरिकी नागरिकों को अपना शिकार बना रहा था।
यह अवैध ऑपरेशन चेन्थी में एक किराए के कार्यालय में एक आईटी कंपनी के मुखौटे के नीचे चल रहा था। इसे सोमवार को 'ऑपरेशन तूफान' नामक नशीली दवाओं के प्रवर्तन अभियान के दौरान छापेमारी के दौरान पकड़ा गया। इस कार्रवाई में लगभग 20 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें से उत्तर भारत के 13 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने मौके से 41 कंप्यूटर, डिजिटल स्टोरेज डिवाइस और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला साइबर अपराध के बढ़ते वैश्विक स्वरूप को दर्शाता है। अपराधी अब स्थानीय स्तर पर रहकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वित्तीय धोखाधड़ी कर रहे हैं, जिससे सीमा पार जांच की आवश्यकता बढ़ जाती है।
यह गिरोह तकनीकी रूप से इतना उन्नत था कि वे अमेरिकी समय क्षेत्र के अनुसार रात भर काम करते थे ताकि पीड़ितों को वास्तविक लग सके।
जांच में पाया गया कि धोखाधड़ी की शुरुआत तब होती थी जब पीड़ितों को फर्जी संदेश मिलते थे कि उनके लोन आवेदन स्वीकृत हो गए हैं। इसके बाद उनसे व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी मांगी जाती थी। यह सारा डेटा गिरोह के कथित मास्टरमाइंड, गुजरात निवासी आकाशदीप चौधरी को भेज दिया जाता था।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
साइबर अपराध के क्षेत्र में भारत पिछले कुछ वर्षों में एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है, जहां फर्जी लोन ऐप्स और फिशिंग स्कैम में तेजी से वृद्धि हुई है। पुलिस अब डिजिटल साक्ष्यों और बैंक खातों के माध्यम से इस घोटाले के वास्तविक पैमाने का आकलन कर रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या भारतीय नागरिक भी इस घोटाले के शिकार हुए हैं?
उत्तर: प्रारंभिक जांच के अनुसार, इस विशेष ऑपरेशन में भारतीयों को निशाना बनाने का कोई सबूत नहीं मिला है; मुख्य लक्ष्य अमेरिकी नागरिक थे।
प्रश्न 2: मास्टरमाइंड की वर्तमान स्थिति क्या है?
उत्तर: मास्टरमाइंड आकाशदीप चौधरी फरार है, जिसके खिलाफ पुलिस ने लुकआउट नोटिस जारी किया है।