मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी ने 15 नए न्यायाधीशों को पद की शपथ दिलाई। इस नियुक्ति के साथ ही न्यायालय की कार्यशील क्षमता बढ़कर 66 न्यायाधीशों तक पहुँच गई है।

मुख्य बातें

  • मद्रास उच्च न्यायालय में 15 नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की गई है।
  • न्यायालय की वर्तमान कार्यशील संख्या अब 75 के स्वीकृत पदों में से 66 हो गई है।
  • मद्रास उच्च न्यायालय में अब 13 महिला न्यायाधीश हैं, जो देश में सर्वाधिक है।

चेन्नई: मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी ने रविवार को 15 नए न्यायाधीशों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस महत्वपूर्ण समारोह में एडवोकेट जनरल विजय नारायण ने नए न्यायाधीशों का स्वागत किया और उनका परिचय कराया।

न्यायालय की बढ़ती क्षमता

इन नियुक्तियों के साथ, मद्रास उच्च न्यायालय की कार्यशील संख्या बढ़कर 66 हो गई है, जबकि न्यायालय की स्वीकृत संख्या 75 न्यायाधीशों की है। न्यायाधीशों के इस नए समूह में बार से पदोन्नत आठ न्यायाधीश शामिल हैं, जिनमें से पांच को सीधे स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया है, जबकि अन्य को एक निश्चित कार्यकाल के लिए अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया है।

महत्वपूर्ण नियुक्तियां और पृष्ठभूमि

नए न्यायाधीशों की सूची में विविध कानूनी पृष्ठभूमि वाले विशेषज्ञ शामिल हैं। उदाहरण के लिए, न्यायाधीश राजनीश पाथियाल, जो एक पूर्व सैन्य अधिकारी के पुत्र हैं, ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के लिए विशेष लोक अभियोजक के रूप में कार्य किया है। वहीं, न्यायाधीश एन. रमेश, जो एक प्रथम पीढ़ी के वकील हैं, ने भी ED के लिए विशेष लोक अभियोजक के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं। न्यायाधीश जी.के. मुथुकुमार बौद्धिक संपदा कानून के विशेषज्ञ हैं।

महिला सशक्तिकरण में अग्रणी

एडवोकेट जनरल विजय नारायण ने इस अवसर पर एक गर्व का क्षण साझा करते हुए कहा कि मद्रास उच्च न्यायालय में वर्तमान में 13 महिला न्यायाधीश हैं, जो देश के सभी उच्च न्यायालयों में सबसे अधिक है। यह न्यायिक क्षेत्र में लैंगिक समावेशिता की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि न्यायाधीशों की संख्या में यह वृद्धि लंबित मामलों के बोझ को कम करने और न्याय वितरण प्रणाली को तेज करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। स्वीकृत संख्या के करीब पहुंचना न्यायिक दक्षता में सुधार का संकेत है।

न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि न केवल लंबित मामलों को कम करेगी, बल्कि न्यायपालिका की विश्वसनीयता को भी मजबूत करेगी।
क्या आप जानते हैं?: मद्रास उच्च न्यायालय भारत के सबसे पुराने उच्च न्यायालयों में से एक है, जिसकी स्थापना 1862 में हुई थी।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: मद्रास उच्च न्यायालय में कुल कितने न्यायाधीशों का पद स्वीकृत है?
उत्तर: मद्रास उच्च न्यायालय में कुल 75 न्यायाधीशों के पद स्वीकृत हैं।

प्रश्न 2: देश में किस उच्च न्यायालय में सबसे अधिक महिला न्यायाधीश हैं?
उत्तर: मद्रास उच्च न्यायालय में 13 महिला न्यायाधीशों के साथ देश में सर्वाधिक महिला न्यायाधीश हैं।