बॉम्बे हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आपराधिक मामले में बरी होना किसी कर्मचारी को स्वचालित रूप से उसकी नौकरी वापस नहीं दिलाता, यदि विभागीय जांच में कदाचार साबित हो चुका हो। अदालत ने आरबीआई के पूर्व कर्मचारी की बहाली की याचिका खारिज कर दी।
मुख्य बिंदु
- आपराधिक अदालत द्वारा बरी किया जाना विभागीय जांच के दंड को अमान्य नहीं करता।
- पूर्व आरबीआई कर्मचारी को 2001 में विभागीय जांच के बाद बर्खास्त किया गया था।
- अदालत ने माना कि बर्खास्तगी का आधार स्वतंत्र विभागीय साक्ष्य थे, न कि केवल एफआईआर।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के एक पूर्व कर्मचारी की याचिका खारिज कर दी है, जिसने आपराधिक धोखाधड़ी के मामले में बरी होने के बाद अपनी नौकरी वापस पाने की मांग की थी। जस्टिस आर आई चागला और जस्टिस फरहान पी दुभाष की पीठ ने कहा कि आपराधिक कार्यवाही में दोषमुक्ति, स्वतंत्र विभागीय जांच के आधार पर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को स्वतः ही अमान्य नहीं बनाती है।
मामले के विवरण के अनुसार, याचिकाकर्ता 1987 में आरबीआई के नेशनल क्लियरिंग सेल में मशीन ऑपरेटर के रूप में शामिल हुआ था। उस पर अन्य कर्मचारियों के साथ मिलकर चेक के साथ छेड़छाड़ करने और बैंकों के साथ धोखाधड़ी करने का आरोप था। इस संबंध में सीबीआई ने मामला दर्ज किया था, लेकिन साथ ही आरबीआई ने अपनी आंतरिक विभागीय जांच भी शुरू की थी। जांच के बाद, उसे 30 अगस्त 2001 को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह फैसला कॉर्पोरेट और सरकारी गवर्नेंस के लिए एक मिसाल है। यह स्पष्ट करता है कि 'आपराधिक मानक' (Criminal Standard) और 'विभागीय मानक' (Departmental Standard) अलग-अलग होते हैं। आपराधिक मामलों में 'संदेह से परे' प्रमाण की आवश्यकता होती है, जबकि विभागीय जांच में 'संभावनाओं की प्रधानता' (Preponderance of Probabilities) के आधार पर कार्रवाई की जा सकती है।
"कानूनी स्थिति यह है कि आपराधिक मामले में बरी होना अपने आप में उस दंड को अमान्य नहीं करता जो एक स्वतंत्र विभागीय जांच के बाद लगाया गया हो।"
अदालत ने पाया कि बर्खास्तगी का आदेश केवल एफआईआर या चार्जशीट पर आधारित नहीं था, बल्कि एक पूर्ण विभागीय जांच का परिणाम था जिसमें गवाहों की जांच हुई और कर्मचारी ने स्वयं अपने कदाचार को स्वीकार किया था। आरबीआई की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एस यू कमदार ने तर्क दिया कि बर्खास्तगी 2001 में ही हो चुकी थी और 2015 में मिली दोषमुक्ति से बहाली का कोई अधिकार नहीं मिलता।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या आपराधिक केस में बरी होने पर नौकरी वापस मिल सकती है?
उत्तर: केवल तभी, जब बर्खास्तगी का एकमात्र आधार आपराधिक केस का फैसला हो। यदि स्वतंत्र विभागीय जांच हुई है, तो बहाली अनिवार्य नहीं है।
प्रश्न 2: इस मामले में कोर्ट ने क्या मुख्य तर्क दिया?
उत्तर: कोर्ट ने कहा कि कर्मचारी ने विभागीय जांच के दौरान अपना कदाचार स्वीकार किया था, इसलिए बरी होने के बावजूद बर्खास्तगी वैध है।