जयपुर में ₹2,676 करोड़ के कथित धोखाधड़ी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नेक्सा एवरग्रीन ग्रुप के मुख्य संचालक सुभाष चंद्र बिजनोरिया को गिरफ्तार कर लिया है। निवेशकों को धोखे से गुजरात के धोलेरा स्मार्ट सिटी में निवेश का झांसा देकर बड़ी राशि हड़पने का आरोप है।

मुख्य बिंदु

  • नेक्सा एवरग्रीन ग्रुप के मुख्य सूत्रधार सुभाष चंद्र बिजनोरिया को ED ने गिरफ्तार किया।
  • मामले में ₹2,676 करोड़ के निवेश के साथ धोखाधड़ी का आरोप है।
  • आरोपियों ने निवेशकों को 60 हफ्तों तक 3% साप्ताहिक रिटर्न का लालच दिया।
  • जांच में पोंजी स्कीम और कई शेल कंपनियों के जाल का खुलासा हुआ है।

जयपुर स्थित प्रवर्तन निदेशालय (ED) के क्षेत्रीय कार्यालय ने नेक्सा एवरग्रीन मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए सुभाष चंद्र बिजनोरिया को गिरफ्तार कर लिया है। बिजनोरिया को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया है। उन्हें सोमवार को एक विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 13 अगस्त तक हिरासत में भेज दिया गया है।

जांच के अनुसार, बिजनोरिया और उनके एक अन्य भागीदार ने मिलकर एक जटिल जाल बुना था। उन्होंने निवेशकों और सहयोगियों के नाम पर कई कंपनियां और प्रोप्राइटरशिप फर्म बनाई थीं, जिनका उपयोग अपराध की कमाई को अलग-अलग खातों में घुमाने (layering) के लिए किया जाता था। यह धोखाधड़ी मुख्य रूप से धोलेरा स्मार्ट सिटी, गुजरात में भूमि विकास और प्लॉटिंग परियोजनाओं में निवेश का वादा करके की गई थी।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला वित्तीय क्षेत्र में बढ़ते 'पोंजी स्कीम' के खतरों को उजागर करता है। निवेशकों को न केवल उच्च रिटर्न का लालच दिया गया, बल्कि नए निवेशक लाने पर लैपटॉप, मोटरसाइकिल और कारों जैसे पुरस्कार देकर एक बहु-स्तरीय रेफरल स्कीम (Multi-level referral scheme) को बढ़ावा दिया गया। यह दर्शाता है कि कैसे संगठित अपराधी तकनीकी और कानूनी खामियों का फायदा उठाकर आम जनता की जमा पूंजी को निशाना बनाते हैं।

इस तरह के बड़े पैमाने के घोटाले वित्तीय सुरक्षा और नियामक निगरानी की गंभीर चुनौतियों को रेखांकित करते हैं।

ED की जांच राजस्थान पुलिस द्वारा दर्ज विभिन्न एफआईआर और चार्जशीट पर आधारित है। जून 2025 में की गई छापेमारी के दौरान, एजेंसी ने जयपुर, सीकर, झुंझुनू और अहमदाबाद के 25 स्थानों से 2.04 करोड़ रुपये नकद और कई महत्वपूर्ण डिजिटल उपकरण बरामद किए थे। इसके अतिरिक्त, विभिन्न संस्थाओं से जुड़े लगभग ₹15 करोड़ के बैंक और क्रिप्टो खातों को भी फ्रीज कर दिया गया है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

नेक्सा एवरग्रीन समूह का मामला पिछले कुछ समय से जांच के दायरे में रहा है। राजस्थान पुलिस ने पहले ही इस समूह के खिलाफ धोखाधड़ी के कई मामले दर्ज किए थे, जिसके बाद ED ने धन शोधन (Money Laundering) के कोण से जांच शुरू की। यह मामला बताता है कि कैसे रियल एस्टेट निवेश के नाम पर बड़े पैमाने पर वित्तीय जालसाजी की जा सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. नेक्सा एवरग्रीन मामला क्या है?
यह ₹2,676 करोड़ का एक कथित धोखाधड़ी मामला है जिसमें निवेशकों को गुजरात में प्लॉटिंग परियोजनाओं में निवेश के नाम पर फंसाया गया था।

2. ED ने अब तक क्या कार्रवाई की है?
ED ने मुख्य आरोपी बिजनोरिया को गिरफ्तार किया है और करोड़ों रुपये की नकदी और क्रिप्टो संपत्तियों को फ्रीज किया है।

क्या आप जानते हैं?: पोंजी स्कीम में, नए निवेशकों से प्राप्त धन का उपयोग पुराने निवेशकों को 'रिटर्न' देने के लिए किया जाता है, ताकि योजना वैध लगे।