केरल के एक ग्राहक ने सोशल मीडिया पर दिखे स्क्रैच कार्ड से धोखा झेला, जिससे उसके फ़ेडरल बैंक खाते से ₹9,854 डेबिट हुए। उपभोक्ता आयोग ने बैंक को पूरी राशि रिफंड और अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश दिया।
मुख्य बिंदु
- केरल में एक ग्राहक को स्क्रैच कार्ड धोखे से ₹9,854 का नुकसान हुआ।
- फ़ेडरल बैंक ने प्रारम्भ में राशि वापस की, लेकिन बाद में पुनः ले ली।
- उपभोक्ता आयोग ने बैंक को पूरी राशि रिफंड और अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश दिया।
घटना का विवरण
2021 में एक केरल निवासी ने सोशल मीडिया पर "अनलिमिटेड कैशबैक" कहता एक स्क्रैच कार्ड देखा, जिसे वह फोनपे और गूगल पे दोनों के नियमित उपयोगकर्ता होने के कारण दो बार स्क्रैच किया। परिणामस्वरूप उसके फ़ेडरल बैंक खाते से क्रमशः ₹4,885 और ₹4,969 डेबिट हो गए।
वह तुरंत बैंक में शिकायत दर्ज कराता है और बैंक द्वारा 15 जुलाई 2021 को दोनों राशियों को फिर से खाते में जमा किया जाता है। लेकिन 4 अगस्त 2021 को बैंक ने यह जमा वापस ले लिया, जिससे ग्राहक को फिर से ₹9,854 का नुकसान हुआ।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia analysis shows कि इस मामले में बैंक ने ग्राहक की सतर्कता को कम करके जिम्मेदारी को ग्राहक पर धकेला, जो उपभोक्ता संरक्षण के सिद्धांतों के विरुद्ध है। ऐसे निर्णय भविष्य में डिजिटल भुगतान प्रणाली की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकते हैं।
"उधारी में ग्राहक की सुरक्षा को प्राथमिकता देना नियामकों की मुख्य जिम्मेदारी है," वित्तीय कानून विशेषज्ञ ने कहा।
उपभोक्ता आयोग का निर्णय
उपभोक्ता आयोग ने पाया कि बैंक ने ग्राहक की सावधानीपूर्वक कार्रवाई को सिद्ध करने के लिये कोई विश्वसनीय साक्ष्य नहीं प्रस्तुत किया। इसलिए, RBI के निर्देशों के अनुसार, बैंक को ₹9,854 रिफंड के साथ ₹5,000 मुआवजा और ₹3,000 प्रक्रिया शुल्क देने का आदेश दिया गया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या ग्राहक को भविष्य में ऐसी धोखाधड़ी से बचने के लिए कोई कदम उठाने चाहिए?
उत्तर: हमेशा अनजान लिंक या प्रमोशन को स्क्रैच न करें और अपने UPI PIN को गोपनीय रखें।
प्रश्न 2: क्या बैंक को इस प्रकार के मामलों में तुरंत रिफंड देना अनिवार्य है?
उत्तर: उपभोक्ता आयोग के आदेश के बाद ही बैंक को रिफंड करना आवश्यक है; अन्यथा नियामक कार्रवाई हो सकती है।