सूरत की साइबर क्राइम शाखा ने केवल 9 दिनों में 5,121 नकली COD ऑर्डर बनाकर ई‑कॉमर्स कंपनी को लगभग 42 लाख रुपये की ठगी की योजना उजागर की। वही डिवाइस, IP और ग्राहक पहचान का उपयोग करके गैंट ने इस बड़े धोखाधड़ी नेटवर्क को चलाया।

मुख्य बिंदु

  • 9 दिनों में 5,121 फर्जी COD ऑर्डर
  • एक ही डिवाइस, IP और ग्राहक ID का उपयोग
  • कुल नुकसान लगभग ₹42 लाख

परिचय

सूरत में एक ई‑कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म को लक्ष्य बनाकर एक सायबर गैंग ने बड़े पैमाने पर फर्जी ऑर्डर जनरेट किए, जिससे कंपनी ने Seller Protection Fund का दुरुपयोग किया और लगभग ₹42 लाख की धोखाधड़ी की।

घटना कैसे हुआ

सुरक्षित विक्रेता पहचान "सुखविलास क्रिएशन" के तहत केवल नौ दिनों में 5,121 ऑर्डर दर्ज किए गए। इन सभी ऑर्डर को अलग‑अलग ग्राहकों के नाम पर दिखाया गया, पर डिजिटल जाँच में एक ही मोबाइल नंबर, IP पता और डिवाइस की पहचान सामने आई।

हिस्टोरिकल बैकग्राउंड

ई‑कॉमर्स में फर्जी ऑर्डर रैकेट पिछले कुछ वर्षों में बढ़ते हुए देखे गए हैं, जहाँ धोखेबाज़ विक्रेता सुरक्षा कोष का दुरुपयोग करके शीघ्र भुगतान प्राप्त करते हैं और फिर ऑर्डर रद्द कर देते हैं। यह मामला इस प्रवृत्ति का एक स्पष्ट उदाहरण है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that such coordinated fake‑order schemes threaten consumer trust and increase operational costs for online marketplaces, prompting stricter verification protocols across the industry.

साइबरक्राइम विश्लेषक डॉ. रमेश कुमार कहते हैं, “ऐसे समन्वित फर्जी ऑर्डर रिंग्स विक्रेता सुरक्षा कोष का शोषण करती हैं और तेजी से परिष्कृत हो रही हैं।”
क्या आप जानते हैं?: भारत में 2024 में फर्जी COD ऑर्डर से हुए नुकसान का अनुमान 150 करोड़ रुपये था।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या यह धोखाधड़ी केवल सूरत तक सीमित थी?

उत्तर: अभी तक यह पता चला है कि नेटवर्क में अन्य राज्यों के कई सहयोगी जुड़े हुए हैं, पर मुख्य ऑपरेशन सूरत में ही संचालित हुआ।

प्रश्न 2: ई‑कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म ने इस घटना पर क्या प्रतिक्रिया दी?

उत्तर: कंपनी ने तुरंत उस सेलर ID को ब्लैकलिस्ट किया और साइबर क्राइम पुलिस के साथ मिलकर विस्तृत जांच शुरू की।