केरल के अलाप्पुझा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक फेसबुक विक्रेता को अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी पाते हुए ग्राहक को मुआवजा देने का आदेश दिया है। मामला वियतनाम कटहल के पौधों के भुगतान के बाद डिलीवरी न मिलने से जुड़ा है।

  • फेसबुक विक्रेता को ₹240 रिफंड और ₹3,000 मुआवजा देने का आदेश।
  • उपभोक्ता फोरम ने इसे 'अनुचित व्यापार व्यवहार' (Unfair Trade Practice) माना।
  • डिजिटल भुगतान (GPay) और चैट स्क्रीनशॉट कोर्ट में पुख्ता सबूत बने।

केरल के अलाप्पुझा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ई-कॉमर्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से होने वाली धोखाधड़ी के खिलाफ एक कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने एक फेसबुक विक्रेता को आदेश दिया है कि वह एक ग्राहक को कुल ₹3,240 का भुगतान करे, जिसने वियतनाम कटहल के दो पौधे खरीदे थे लेकिन उन्हें कभी प्राप्त नहीं हुए।

मामले के विवरण के अनुसार, शिकायतकर्ता ने 30 दिसंबर, 2025 को फेसबुक पर एक विज्ञापन देखा था। विक्रेता, जिसकी पहचान अभिजीत एम वी के रूप में हुई, ने पौधों के लिए भुगतान करने को कहा। ग्राहक ने GPay के माध्यम से ₹180 पौधों के लिए और ₹60 कूरियर शुल्क के रूप में कुल ₹240 का भुगतान किया। भुगतान के बाद, विक्रेता ने बार-बार आश्वासन दिया कि पौधे जल्द ही डिलीवर कर दिए जाएंगे, लेकिन अंततः उसने कॉल का जवाब देना बंद कर दिया।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह फैसला उन लाखों उपभोक्ताओं के लिए एक मिसाल है जो सोशल मीडिया मार्केटप्लेस पर भरोसा करते हैं। अक्सर छोटे स्तर की धोखाधड़ी (जैसे ₹200-₹500) के लिए लोग कानूनी रास्ता नहीं चुनते, लेकिन यह निर्णय साबित करता है कि राशि चाहे कितनी भी कम क्यों न हो, उपभोक्ता कानून हर नागरिक की सुरक्षा करता है। यह विक्रेताओं के लिए एक चेतावनी है कि वे डिजिटल फुटप्रिंट के जरिए पकड़े जा सकते हैं।

"सोशल मीडिया पर बिना किसी आधिकारिक वेबसाइट या रसीद के भुगतान करना जोखिम भरा है, लेकिन उपभोक्ता फोरम अब डिजिटल साक्ष्यों को प्राथमिकता दे रहे हैं।"

आयोग के अध्यक्ष शोली पी आर और सदस्य सी के लेखम्मा ने पाया कि शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत चैट स्क्रीनशॉट और भुगतान के प्रमाण स्पष्ट रूप से विक्रेता की लापरवाही और धोखाधड़ी को दर्शाते हैं। विक्रेता आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ और उसे भेजे गए नोटिस भी 'अनक्लेम्ड' (unclaimed) लौट आए, जिससे मामला एकतरफा (ex-parte) तय हुआ।

कोर्ट ने विक्रेता को आदेश दिया है कि वह ₹240 का रिफंड, ₹2,000 मुआवजा और ₹1,000 कानूनी लागत के रूप में कुल राशि का भुगतान 30 दिनों के भीतर करे।

क्या आप जानते हैं?: भारत में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को भी जवाबदेह ठहराया जा सकता है, चाहे वे केवल मध्यस्थ हों या सीधे विक्रेता।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: यदि कोई ऑनलाइन विक्रेता उत्पाद नहीं भेजता है तो क्या करना चाहिए?
उत्तर: सबसे पहले विक्रेता से संपर्क करें, यदि समाधान न मिले तो राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) पर शिकायत दर्ज करें या जिला उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाएं।

प्रश्न 2: क्या व्हाट्सएप या फेसबुक चैट कोर्ट में सबूत के तौर पर मान्य हैं?
उत्तर: हाँ, भारतीय साक्ष्य अधिनियम और उपभोक्ता कानूनों के तहत डिजिटल स्क्रीनशॉट और ट्रांजैक्शन आईडी को वैध सबूत माना जाता है।