अहमदाबाद पुलिस ने एक विशाल अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क का खुलासा किया है जो चीन, पाकिस्तान, हांगकांग और भारत में फैला हुआ था। इस गिरोह ने 'साइबर अपराध सेवा' (CaaS) के माध्यम से हजारों उपकरणों को संक्रमित किया और लाखों का चूना लगाया।

  • अहमदाबाद पुलिस ने पश्चिम बंगाल के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जो अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह को सेवाएं प्रदान कर रहे थे।
  • गिरोह ने 21,000 से अधिक OTP और हजारों फर्जी सिम कार्ड बेचकर करोड़ों का साम्राज्य खड़ा किया था।
  • यह नेटवर्क चीन, पाकिस्तान, हांगकांग और भारत में फैला हुआ था, जो 'बॉस स्कैम' को अंजाम दे रहा था।
  • 10,000 से अधिक संक्रमित उपकरणों को सुरक्षित कर नागरिकों को बड़े वित्तीय नुकसान से बचाया गया।

अहमदाबाद सिटी पुलिस ने मंगलवार को एक बहुराष्ट्रीय 'बॉस स्कैम' (Boss Scam) नेटवर्क का पर्दाफाश करने का दावा किया है। इस गिरोह के अपराधी कंपनियों के निदेशकों और वरिष्ठ अधिकारियों का रूप धरकर उनके कर्मचारियों को बड़े पैमाने पर धन हस्तांतरण करने के लिए धोखा देते थे। इस मामले में पुलिस ने पश्चिम बंगाल के दो निवासियों, इमरान अली पियादा और इन्जामुल को गिरफ्तार किया है, जो ट्रांजिट वारंट के माध्यम से गुजरात लाए गए हैं।

पुलिस के अनुसार, ये दोनों आरोपी एक बड़े बहुराष्ट्रीय नेटवर्क को 'साइबर अपराध सेवा' (Cybercrime as a Service - CaaS) प्रदान कर रहे थे। वे फर्जी सिम कार्ड, मोबाइल नंबर, OTP और व्हाट्सएप अकाउंट की आपूर्ति करते थे, जो साइबर धोखाधड़ी को सुगम बनाने के लिए उपयोग किए जाते थे। आरोपी पियादा, जो पहले टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं के लिए एक एजेंट के रूप में काम करता था, ग्राहकों के बायोमेट्रिक विवरण का दुरुपयोग करके फर्जी सिम कार्ड बनाता था।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल दो व्यक्तियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक संगठित वैश्विक डिजिटल युद्ध का संकेत है। जब अपराधी 'सेवा के रूप में अपराध' (CaaS) मॉडल अपनाते हैं, तो वे तकनीकी कौशल की कमी वाले अपराधियों को भी उच्च-स्तरीय हमले करने में सक्षम बना देते हैं, जिससे सुरक्षा की पारंपरिक दीवारें ढह जाती हैं।

यह गिरोह केवल सिम कार्ड नहीं बेच रहा था, बल्कि वे साइबर अपराधियों को एक डिजिटल पहचान और कवच प्रदान कर रहे थे।

जांच के दौरान, पुलिस को मोबाइल उपकरणों में लगभग 4,500 सिम कार्ड मिले। इसके आधार पर साइबर क्राइम ब्रांच ने 26 राज्यों में दर्ज 251 NCRP शिकायतों का विश्लेषण किया। इन शिकायतों में 194 ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, 3 बॉस स्कैम, और हैकिंग सहित विभिन्न गंभीर साइबर अपराध शामिल थे। पुलिस ने पाया कि आरोपी पियादा ने पिछले पांच वर्षों में ई-कॉमर्स और ऑनलाइन गेमिंग के लिए लगभग 21,000 OTP बेचे, जिससे उसने 21 लाख रुपये से अधिक कमाए।

तकनीकी विश्लेषण से पता चला है कि इस घोटाले के लिए उपयोग किया जाने वाला मैलवेयर संभवतः चीन से विकसित किया गया था और इसे इस्लामाबाद स्थित एक कॉल सेंटर के माध्यम से भारतीय नागरिकों को निशाना बनाने के लिए उपयोग किया जा रहा था। अपराधी अपनी पहचान छिपाने के लिए चीन स्थित VPN सेवाओं और भारत, पाकिस्तान, हांगकांग जैसे देशों के बुनियादी ढांचे का उपयोग कर रहे थे।

बॉस स्कैम कैसे काम करता है?

बॉस स्कैम में, अपराधी आरबीआई या किसी सरकारी संस्थान के अधिकारी बनकर कंपनी के CEO या निदेशक को व्हाट्सएप या ईमेल पर एक ZIP फ़ाइल भेजते हैं। इस फ़ाइल में खतरनाक '.exe' या '.dll' फाइलें होती हैं। जैसे ही इसे कंप्यूटर पर खोला जाता है, अपराधी का नियंत्रण व्हाट्सएप वेब सत्र पर हो जाता है। इसके बाद, वे स्वयं को CEO के रूप में पेश करते हैं और कर्मचारियों से पैसे की मांग करते हैं।

Did You Know?: साइबर अपराधी अब 'CaaS' मॉडल का उपयोग कर रहे हैं, जहाँ वे अपराध करने के लिए तकनीकी उपकरण और डेटा किराए पर देते हैं।

Frequently Asked Questions

1. 'बॉस स्कैम' से कैसे बचें?
किसी भी अज्ञात ईमेल या व्हाट्सएप संदेश से प्राप्त ZIP फ़ाइल या अटैचमेंट को कभी न खोलें, विशेष रूप से यदि वे वरिष्ठ अधिकारियों के नाम से आए हों। हमेशा दूसरे माध्यम से पुष्टि करें।

2. क्या सिम कार्ड का दुरुपयोग करना अपराध है?
हाँ, ग्राहकों के बायोमेट्रिक विवरण का उपयोग करके बिना जानकारी के सिम कार्ड बनाना एक गंभीर कानूनी अपराध है।