दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि जनतर मंतर में छात्र प्रदर्शनों के दौरान फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) का उपयोग केवल उन 2,873 व्यक्तियों की पहचान करने के लिए किया गया था जिनका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड है।

  • दिल्ली पुलिस ने FRS के जरिए जनतर मंतर पर 2,873 अपराधियों की पहचान की।
  • अधिकारियों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की प्रोफाइलिंग या डेटा संग्रह से इनकार किया।
  • पहचाने गए लोगों में 47 'हिस्ट्री-शीटर' शामिल हैं जिन पर गंभीर मामले दर्ज हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट वर्तमान में विरोध स्थल पर अत्यधिक पुलिस बल के उपयोग की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है।

सुप्रीम कोर्ट में दायर एक जवाबी हलफनामे में, दिल्ली पुलिस ने जनतर मंतर में पिछले महीने हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी (FRS) के जरिए सामूहिक निगरानी के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पुलिस का दावा है कि यह सिस्टम हर व्यक्ति की प्रोफाइलिंग नहीं करता, बल्कि केवल उन्हीं को पकड़ता है जिनका पिछला आपराधिक रिकॉर्ड रहा है।

सोमवार रात को दायर हलफनामे में कहा गया कि केवल उन व्यक्तियों की जांच की जाएगी जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि उन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी जो उन 2,873 व्यक्तियों की सूची में नहीं हैं, जिन पर हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती, बलात्कार और POCSO जैसे गंभीर आरोप हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला भारत में राष्ट्रीय सुरक्षा और निजता के अधिकार के बीच के संघर्ष को दर्शाता है। जहां पुलिस FRS को 'निवारक पुलिसिंग' का साधन बता रही है, वहीं नागरिक अधिकार कार्यकर्ता इसे लोकतांत्रिक विरोध के लिए एक खतरे के रूप में देखते हैं। जब तकनीक पारदर्शी नहीं होती, तो 'अपराधी' और 'शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी' के बीच का अंतर धुंधला हो जाता है।

मजबूत कानूनी ढांचे के बिना सार्वजनिक स्थानों पर बायोमेट्रिक निगरानी का उपयोग अपराध रोकथाम के नाम पर सामूहिक निगरानी को सामान्य बनाने का जोखिम पैदा करता है।

पुलिस ने विवरण दिया कि FRS के माध्यम से पहचाने गए 2,873 व्यक्तियों में से 2,402 की पहचान 'क्राइम कुंडली' डेटाबेस से और 471 की पहचान डोजियर रिकॉर्ड से हुई। इनमें से 92 लोग ऐसे हैं जो 10 से अधिक मामलों में शामिल हैं, और उनमें से 47 घोषित हिस्ट्री-शीटर हैं।

पुलिस ने आगे तर्क दिया कि 20 जुलाई से 26 जुलाई के बीच विरोध स्थल के आसपास सात मोटर वाहन चोरी और 67 अन्य चोरी के मामले दर्ज हुए, जो यह दर्शाता है कि प्रदर्शन में असामाजिक तत्वों और अपराधियों ने घुसपैठ की थी। उनका कहना है कि अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करके इन तत्वों को बाहर निकालना शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के हित में है।

डेटा के दुरुपयोग के आरोपों पर पुलिस ने कहा कि यह एक गलत नैरेटिव है कि आधार विवरणों का उपयोग किया गया या डेटा निजी संस्थाओं को बेचा गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन अपराधियों का बायोमेट्रिक डेटा पहले से ही राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो के पास कानूनी प्रावधानों के तहत उपलब्ध है।

क्या आप जानते हैं?: फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) किसी फोटो या वीडियो से चेहरे की विशेषताओं को मैप करता है और उसकी तुलना डेटाबेस में मौजूद 'फेसप्रिंट' से करता है।

पहचान का विवरण

डेटाबेस का स्रोतपहचाने गए व्यक्तियों की संख्या
क्राइम कुंडली डेटाबेस2,402
डोजियर रिकॉर्ड471
कुल पहचान2,873

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. क्या FRS विरोध प्रदर्शन में मौजूद हर व्यक्ति का डेटा कैप्चर करता है?
नहीं, दिल्ली पुलिस के अनुसार, यह सिस्टम केवल उन्हीं चेहरों को कैप्चर और मैच करता है जो पहले से ही गंभीर अपराधों के पुलिस डेटाबेस में दर्ज हैं।

2. सिस्टम द्वारा चेहरा पहचानने के बाद क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है?
FRS केवल पहला कदम है; इसके बाद पुलिस संबंधित व्यक्ति का फील्ड वेरिफिकेशन करती है और पुष्टि होने पर ही कानूनी कार्रवाई की जाती है।