मुंबई पुलिस ने पुणे में संचालित दो फर्जी कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ किया है, जो प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश दिलाने के नाम पर अभिभावकों से लाखों रुपये ठग रहे थे। पुलिस ने इस मामले में 10 लोगों को गिरफ्तार कर लग्जरी कारों सहित 1.35 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है।
- पुणे के लोहेगांव और खराड़ी से संचालित दो फर्जी कॉल सेंटरों का भंडाफोड़।
- 10 आरोपी गिरफ्तार, जिनमें से 5 बी.टेक स्नातक और अन्य इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से हैं।
- कुल 1.35 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त, जिसमें बीएमडब्ल्यू और जगुआर जैसी लग्जरी कारें शामिल हैं।
- पीड़ितों से आईआईटी हैदराबाद जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश का वादा कर लाखों की ठगी।
मुंबई पुलिस ने एक बड़े फर्जी कॉलेज एडमिशन रैकेट का खुलासा करते हुए पुणे से 10 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी पुणे के लोहेगांव और खराड़ी स्थित दो अवैध कॉल सेंटरों के माध्यम से देशभर के अभिभावकों को अपना शिकार बना रहे थे। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और गुजरात जैसे राज्यों में सक्रिय था और अब तक कम से कम छह अलग-अलग मामलों में इनका नाम सामने आया है।
इस घोटाले का खुलासा तब हुआ जब मुंबई की निवासी ग्रेसी पीटर ग्वामी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने इंस्टाग्राम पर 'techorbit1111' नामक पेज के माध्यम से इन जालसाजों से संपर्क किया था। आरोपियों ने उनके बेटे को एनआरआई या मैनेजमेंट कोटा के जरिए आईआईटी हैदराबाद में प्रवेश दिलाने का झांसा दिया। विश्वास जीतने के लिए आरोपी उन्हें कैंपस तक भी ले गए और धीरे-धीरे किस्तों में कुल 16.50 लाख रुपये ठग लिए।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल वित्तीय धोखाधड़ी नहीं है, बल्कि शिक्षा प्रणाली में व्याप्त 'प्रवेश की होड़' और 'मैनेजमेंट कोटा' के प्रति माता-पिता के विश्वास का दुरुपयोग है। जब शिक्षित लोग, विशेष रूप से इंजीनियरिंग स्नातक, अपराध की दुनिया में उतरते हैं, तो वे तकनीकी शब्दावली का उपयोग करके शिकार को आसानी से भ्रमित कर देते हैं, जिससे ऐसे अपराधों को पकड़ना कठिन हो जाता है।
शिक्षित अपराधियों द्वारा संचालित यह रैकेट दर्शाता है कि कैसे तकनीकी ज्ञान का उपयोग मासूम अभिभावकों की महत्वाकांक्षाओं को हथियार बनाने के लिए किया जा रहा है।
पुलिस छापेमारी के दौरान 22 मोबाइल फोन, 23 सिम कार्ड, लैपटॉप और कई डेबिट कार्ड बरामद किए गए। पुलिस ने मुख्य आरोपी के बैंक खातों से 24 लाख रुपये फ्रीज किए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि मुख्य आरोपी के पास बीएमडब्ल्यू, जगुआर और मारुति सुजुकी सियाज जैसी महंगी कारें थीं, लेकिन वे दूसरों के नाम पर पंजीकृत थीं ताकि कानूनी जांच से बचा जा सके।
डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (पश्चिम जोन 3), दत्ता नलावाडे के अनुसार, इस गिरोह के सदस्य इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से होने के कारण प्रवेश प्रक्रिया की बारीकियों और तकनीकी शब्दों से अच्छी तरह वाकिफ थे। इसी ज्ञान का उपयोग वे अभिभावकों को विश्वास दिलाने के लिए करते थे। यह रैकेट 2019 से लोहेगांव से संचालित हो रहा था, जिसे 2024 में और विस्तारित किया गया।
| विवरण | बरामदगी / विवरण |
|---|---|
| कुल गिरफ्तारियां | 10 व्यक्ति |
| कुल जब्त संपत्ति | ₹1.35 करोड़ |
| लग्जरी कारें | BMW, Jaguar, Ciaz |
| प्रभावित राज्य | महाराष्ट्र, यूपी, कर्नाटक, गुजरात |
Frequently Asked Questions
1. इस रैकेट में किन संस्थानों के नाम का उपयोग किया गया था?
आरोपियों ने आईआईटी हैदराबाद, पुणे इंस्टीट्यूट ऑफ कंप्यूटर टेक्नोलॉजी, नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी और दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के नाम का उपयोग किया।
2. आरोपियों ने विश्वास जीतने के लिए क्या तरीका अपनाया?
आरोपी पीड़ितों को वास्तविक कॉलेज कैंपस ले जाते थे और इंजीनियरिंग शब्दावली का उपयोग करते थे ताकि वे खुद को संस्थान से जुड़ा हुआ दिखा सकें।