केरल की एक विशेष POCSO अदालत ने दो नाबालिग सौतेली बेटियों के साथ यौन शोषण करने वाले 50 वर्षीय व्यक्ति को 120 साल के कठोर कारावास की ऐतिहासिक सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर भारी जुर्माना भी लगाया है और पीड़ितों के लिए मुआवजे का आदेश दिया है।

  • दोषी को दो अलग-अलग मामलों में 60-60 साल की कठोर सजा सुनाई गई है।
  • अदालत ने ₹90,000 का जुर्माना लगाया है, जो पीड़ितों को दिया जाएगा।
  • अपराध का खुलासा बच्चों की बड़ी बहन द्वारा किया गया।
  • दोषी को तवनूर सेंट्रल जेल भेज दिया गया है।

केरल के मलप्पुरम जिले के मनजेरी स्थित विशेष POCSO अदालत ने एक अत्यंत गंभीर मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए, अपनी ही दो नाबालिग सौतेली बेटियों के साथ यौन शोषण करने वाले 50 वर्षीय व्यक्ति को 120 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। न्यायाधीश के.एस. वरुण ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोषी पर भारी जुर्माना भी लगाया है।

न्यायालय के विस्तृत आदेश के अनुसार, दोषी को दो अलग-अलग मामलों में 60-60 साल के कठोर कारावास की सजा दी गई है। इसके साथ ही, प्रत्येक मामले में ₹45,000 का जुर्माना लगाया गया है, जिससे कुल जुर्माना ₹90,000 हो जाता है। यदि दोषी यह जुर्माना भरने में विफल रहता है, तो उसे प्रत्येक मामले में अतिरिक्त तीन महीने की जेल काटनी होगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जुर्माने की राशि सीधे जीवित बचे बच्चों (survivors) को प्रदान की जाएगी।

मामले का विवरण और खुलासा

जांच में सामने आया कि आरोपी कोंडोट्टी में बच्चों की माँ और उनके पांच बच्चों के साथ एक किराए के घर में रहता था। उसने 12 वर्षीय बच्ची का शोषण सितंबर 2023 से और 11 वर्षीय बच्ची का मार्च 2025 से करना शुरू किया था। यह शोषण तब हुआ जब बच्चे अनाथालय से छुट्टियों के दौरान घर लौटे थे।

इस भयावह अपराध का खुलासा तब हुआ जब बच्चों की बड़ी बहन, जो डर के कारण घर छोड़कर चली गई थी, ने 2025 की गर्मियों की छुट्टियों के दौरान बच्चों को कोझिकोड बीच पर ले जाने का निर्णय लिया। वहां बच्चों ने अपनी बहन को हुए दुर्व्यवहार के बारे में बताया, जिसके बाद कोंडोट्टी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया गया।

BozokMedia विश्लेषण: न्याय की जीत

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह फैसला समाज में बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति को मजबूत करता है। लंबी अवधि की सजा न केवल अपराधी को दंडित करती है, बल्कि अन्य संभावित अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश भी भेजती है। जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिया गया है कि वे 'पीड़ित मुआवजा कोष' से दोनों बच्चों के लिए तत्काल सहायता सुनिश्चित करें।

यह सजा समाज के उन लोगों के लिए एक चेतावनी है जो घर की चारदीवारी के भीतर बच्चों की सुरक्षा को खतरे में डालते हैं।

अदालत में मामले की मजबूती के लिए 18 गवाहों के बयान दर्ज किए गए और 18 महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए गए। पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट और POCSO अधिनियम के तहत मजबूत सबूतों ने सजा को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्तमान में, दोषी को तवनूर सेंट्रल जेल में स्थानांतरित कर दिया गया है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: दोषी को कुल कितने साल की सजा मिली है?
उत्तर: दोषी को दो अलग-अलग अपराधों के लिए 60-60 साल की सजा मिली है, जो कुल 120 साल होती है।

प्रश्न 2: पीड़ितों को आर्थिक सहायता कैसे मिलेगी?
उत्तर: अदालत ने दोषी पर जुर्माना लगाया है जो पीड़ितों को दिया जाएगा, साथ ही जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण को मुआवजा कोष से सहायता देने का निर्देश दिया है।

Did You Know?: POCSO अधिनियम विशेष रूप से बच्चों को यौन अपराधों से बचाने के लिए बनाया गया है, जिसमें सख्त सजा का प्रावधान है।