दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार के उस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें लक्ष्मी योजना के लाभ के लिए स्थानीय सांसद या विधायक का समर्थन अनिवार्य किया गया है। अदालत ने इसे योजनाओं के राजनीतिकरण की संभावना बताते हुए सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है।
- दिल्ली उच्च न्यायालय ने लक्ष्मी योजना के लिए MP/MLA के एंडोर्समेंट (समर्थन) की आवश्यकता पर सवाल उठाए।
- अदालत ने कहा कि पात्रता की जांच अन्य दस्तावेजों के माध्यम से की जा सकती है, राजनीतिक सिफारिश की जरूरत नहीं है।
- याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह नियम कल्याणकारी योजनाओं को राजनीतिक संरक्षण का साधन बना सकता है।
- मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त को निर्धारित की गई है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को दिल्ली सरकार के एक विवादास्पद फैसले पर तीखी टिप्पणी की। अदालत ने 'दिल्ली लक्ष्मी योजना' के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए स्थानीय सांसद (MP) या विधायक (MLA) के समर्थन पत्र (Endorsement) की अनिवार्यता पर सवाल खड़े किए हैं। यह योजना महिलाओं को प्रति माह ₹2,500 की वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने कहा कि जब पात्रता को अन्य आधिकारिक दस्तावेजों के माध्यम से सत्यापित किया जा सकता है, तो ऐसे राजनीतिक समर्थन की आवश्यकता न्यायसंगत नहीं लगती। अदालत ने सरकार से इस मुद्दे पर निर्देश मांगे हैं और मामले को 24 अगस्त के लिए सूचीबद्ध किया है। बेंच ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "हम इसे मंजूरी नहीं दे सकते।"
राजनीतिक संरक्षण बनाम अधिकार
यह मामला पूर्व कांग्रेस पार्षद अभिषेक दत्त और मौजूदा पार्षद वेदपाल शीतल चौधरी द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से सामने आया है। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि जनप्रतिनिधियों से सिफारिश को अनिवार्य बनाना उन्हें 'असीमित विवेकाधिकार' प्रदान करता है। इससे एक नागरिक का संवैधानिक अधिकार, राजनीतिक संरक्षण (Political Patronage) का उपकरण बन सकता है।
याचिका के अनुसार, 1 अगस्त को जब योजना का ऑनलाइन पोर्टल शुरू हुआ, तो पंजीकरण के लिए MP/MLA का समर्थन पत्र अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया। याचिका में यह भी कहा गया कि यदि कोई प्रतिनिधि समर्थन देने से इनकार कर देता है, तो आवेदकों के पास शिकायत निवारण का कोई तंत्र नहीं है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि कल्याणकारी योजनाओं में राजनीतिक हस्तक्षेप न केवल पारदर्शिता को बाधित करता है, बल्कि समाज के सबसे वंचित वर्गों को उनके अधिकारों से वंचित भी कर सकता है। यदि किसी लाभार्थी का स्थानीय नेता से राजनीतिक मतभेद है, तो वह सीधे तौर पर सरकारी सहायता से कट सकता है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
कल्याणकारी योजनाओं का लाभ किसी राजनीतिक कृपा पर नहीं, बल्कि पात्र होने के प्रमाण पर आधारित होना चाहिए।
लक्ष्मी योजना की पात्रता और शर्तें
योजना के तहत, 21 से 60 वर्ष की आयु की महिलाएं, जिनके परिवार की वार्षिक आय ₹2.5 लाख तक है, आवेदन कर सकती हैं। हालांकि, कुछ शर्तें पात्रता को सीमित करती हैं:
| पात्रता मानदंड | शर्तें / अपवाद |
|---|---|
| आयु सीमा | 21 से 60 वर्ष |
| आय सीमा | ₹2.5 लाख प्रति वर्ष तक |
| निवास | दिल्ली के निवासी (कम से कम 10 वर्ष) |
| अपवाद (अपात्र) | आयकर दाता, सरकारी कर्मचारी, 4-व्हीलर मालिक, 3 से अधिक बच्चे |
योजना में यह भी प्रावधान है कि परिवार की सबसे बड़ी पात्र महिला आवेदन कर सकती है। इसके अलावा, आवेदक का दिल्ली का पंजीकृत मतदाता होना अनिवार्य है।
Frequently Asked Questions
1. दिल्ली लक्ष्मी योजना क्या है?
यह दिल्ली सरकार की एक योजना है जो पात्र महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण के लिए ₹2,500 प्रति माह की वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
2. कोर्ट ने क्या आपत्ति जताई है?
कोर्ट ने इस बात पर आपत्ति जताई है कि योजना के नियमों में कहीं भी MP या MLA के समर्थन पत्र का उल्लेख नहीं है, फिर भी पोर्टल पर इसे अनिवार्य बनाया गया है।