दिल्ली पुलिस ने छह बड़े महानगरों में कैंसर के नकली और अवैध रूप से चुराए गए दवाओं के एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसमें चार बड़े निजी अस्पतालों के कर्मचारी भी शामिल हैं।
- दिल्ली पुलिस ने 6 महानगरों में कैंसर की नकली और अवैध दवाओं के नेटवर्क को तोड़ा।
- गिरफ्तार किए गए 17 आरोपियों में 4 निजी अस्पतालों के कर्मचारी शामिल हैं।
- गिरोह सरकारी डिपो (CGHS) से दवाएं चुराता था और नकली शीशियां बनाकर बेचता था।
- Keytruda जैसी महंगी दवाओं के नकली वर्जन मरीजों को दिए जा रहे थे।
दिल्ली पुलिस ने एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामले का खुलासा करते हुए 17 लोगों को गिरफ्तार किया है, जो छह प्रमुख महानगरों में कैंसर रोगियों को नकली और अवैध रूप से डायवर्ट की गई दवाएं बेच रहे थे। इस गिरोह में चार बड़े निजी अस्पतालों के कर्मचारी भी शामिल पाए गए हैं, जो मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे थे।
पुलिस जांच के अनुसार, यह अवैध नेटवर्क तीन मुख्य रास्तों से काम कर रहा था: पहला, सरकारी संस्थानों और गोदामों (जैसे CGHS) से दवाओं की चोरी; दूसरा, निजी अस्पतालों से कैंसर की दवाओं की शीशियां और पैकेजिंग सामग्री की चोरी; और तीसरा, पूरी तरह से नकली दवाओं का निर्माण। यह गिरोह Keytruda, Opdyta, और Darzalex जैसी जीवन रक्षक दवाओं को निशाना बना रहा था, जिनकी कीमत प्रति शीशी 2 लाख रुपये तक हो सकती है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक चोरी का मामला नहीं है, बल्कि एक संगठित अपराध है जो स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की खामियों का फायदा उठाता है। जब अस्पताल के कर्मचारी और सरकारी डिपो के लोग इस तरह के नेटवर्क में शामिल होते हैं, तो सबसे कमजोर और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज सीधे तौर पर मौत के जाल में फंस जाते हैं।
अपराधी शीशियों और पैकेजिंग की नकल करने के लिए रसायनों का उपयोग करते थे और नकली बैच नंबर डालकर मरीजों को ठगते थे।
जांच में पाया गया कि आरोपी नकली दवाओं की शीशियों को असली जैसा दिखाने के लिए Acetone जैसे रसायनों का उपयोग करते थे ताकि बैच नंबर और MRP को मिटाया जा सके। वे शीशियों में स्टरलाइज्ड पानी भरकर उन्हें असली दवा के रूप में कम कीमत पर बेचते थे। पुलिस ने अब तक 588 भरी हुई शीशियां और कई खाली डिब्बे बरामद किए हैं।
गिरफ्तार आरोपियों में आनंद कुमार (नोएडा), दीपक (फरीदाबाद), और मयंक गर्ग (गुरुग्राम) जैसे नाम शामिल हैं। इसके अलावा, अस्पतालों से दवाएं निकालने का काम करने वाले नर्सिंग इंचार्ज जसवंत शर्मा को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ के CGHS केंद्रों की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि सरकारी स्टॉक का रिसाव कैसे हुआ।
Frequently Asked Questions
1. यह गिरोह दवाओं को कैसे प्राप्त करता था?
यह गिरोह सरकारी गोदामों से चोरी, निजी अस्पतालों से लूट और खुद नकली दवाएं बनाकर काम करता था।
2. किन प्रमुख दवाओं का दुरुपयोग किया गया?
Keytruda, Opdyta, Darzalex, और Imfinzi जैसी महंगी इम्यूनोथेरेपी दवाओं का उपयोग किया गया था।