गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के एक कांस्टेबल की सेवा समाप्ति के फैसले को सही ठहराया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सशस्त्र बलों की भूमिका लड़ाकू होती है, जिसमें दृष्टि दोष के लिए कोई स्थान नहीं है।
- गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने रंग अंधापन (Colour Blindness) के कारण CRPF कांस्टेबल की बर्खास्तगी को वैध माना।
- अदालत ने कहा कि CRPF के सभी पद लड़ाकू भूमिकाओं के लिए होते हैं, कोई भी पद गैर-लड़ाकू नहीं है।
- कांस्टेबल ने शामिल होते समय स्वयं इस बात की लिखित सहमति (Undertaking) दी थी।
गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के एक कांस्टेबल की सेवा समाप्ति के आदेश को बरकरार रखा है। यह मामला तब शुरू हुआ जब 2014 में भर्ती हुए इस कांस्टेबल को 2016 में रंग अंधापन (Colour Blindness) से पीड़ित पाया गया। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि सशस्त्र बल ऐसी भूमिकाओं के लिए हैं जिनमें हथियारों का उपयोग और युद्ध जैसी स्थितियों में तैनाती शामिल है।
न्यायमूर्ति कौशिक गोस्वामी ने याचिकाकर्ता की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि चूंकि उसने दो साल तक सेवा दी है, इसलिए उसे अन्य गैर-लड़ाकू पदों पर रखा जाना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल समय बीत जाने से नीतिगत नियमों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता। कानून के अनुसार, यदि भर्ती के बाद किसी दोष का पता चलता है, तो सेवा समाप्त करना निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह फैसला सुरक्षा बलों में शारीरिक मानकों की अनिवार्यता को रेखांकित करता है। सशस्त्र बलों में सटीकता और दृष्टि का महत्व अत्यधिक है, क्योंकि एक छोटी सी चूक भी परिचालन संबंधी गंभीर खतरे पैदा कर सकती है। यह निर्णय स्पष्ट करता है कि सेवा की शर्तें और सुरक्षा संबंधी मानक व्यक्तिगत करियर की अवधि से ऊपर हैं।
सशस्त्र बलों में शारीरिक फिटनेस और दृष्टि संबंधी मानक केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि परिचालन सुरक्षा की नींव हैं।
मामले की पृष्ठभूमि में यह तथ्य शामिल है कि कांस्टेबल ने 2014 में 11वीं बटालियन में शामिल होते समय एक लिखित वचनपत्र (Undertaking) दिया था। इस वचनपत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि यदि सेवा के दौरान किसी भी चरण में उसे रंग अंधापन पाया जाता है, तो वह सेवा समाप्ति के परिणाम को स्वीकार करेगा।
केंद्रीय सरकार के वकील के.के. पाराशर ने तर्क दिया कि गृह मंत्रालय की 2013 की नीति के तहत, रंग अंधापन भर्ती और सेवा में बने रहने के लिए एक अनिवार्य अयोग्यता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि CRPF में वर्तमान में कोई भी पद 'गैर-लड़ाकू' नहीं है; आपात स्थिति में हर जवान को हथियार चलाने के लिए प्रशिक्षित होना अनिवार्य है।
| विशेषता | याचिकाकर्ता का तर्क | अदालत/CRPF का निर्णय |
|---|---|---|
| सेवा की अवधि | 2 साल की सेवा के बाद बर्खास्तगी अनुचित है। | समय बीतने से नीतिगत नियम नहीं बदलते। |
| वैकल्पिक पद | अन्य गैर-लड़ाकू पदों पर रखा जाना चाहिए। | CRPF में कोई भी पद गैर-लड़ाकू नहीं है। |
| सहमति/वचनपत्र | चुनौती दी जा सकती है। | लिखित वचनपत्र स्पष्ट और बाध्यकारी है। |
अदालत ने अंततः यह निष्कर्ष निकाला कि भर्ती नीति का उल्लंघन नहीं किया गया है और याचिकाकर्ता ने स्वयं उन शर्तों को स्वीकार किया था जिनके आधार पर अब वह चुनौती दे रहा है।
Frequently Asked Questions
1. क्या CRPF में रंग अंधापन एक अयोग्यता है?
हाँ, गृह मंत्रालय की नीति के अनुसार, रंग अंधापन CRPF में भर्ती और सेवा के लिए एक अनिवार्य अयोग्यता है।
2. अदालत ने कांस्टेबल को अन्य पद देने से क्यों मना किया?
क्योंकि अदालत ने पाया कि CRPF में सभी पदों के लिए लड़ाकू प्रशिक्षण और क्षमता अनिवार्य है।