केरल उच्च न्यायालय ने कोचीन देवस्वम बोर्ड द्वारा एक अधिकारी के आवास और कार पर 28.44 लाख रुपये खर्च करने पर 'आश्चर्य और निराशा' व्यक्त की है। अदालत ने नियमों का उल्लंघन करते हुए विलासिता की वस्तुओं पर खर्च करने की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है।
- कोचीन देवस्वम बोर्ड ने अधिकारी के आवास और कार पर ₹28.44 लाख खर्च किए।
- नई मारुति ग्रैंड विटारा की खरीद सरकारी वाहन प्रतिस्थापन मानदंडों का उल्लंघन थी।
- अदालत ने धार्मिक संस्थानों के धन का उपयोग अधिकारियों की 'विलासिता' के लिए करने की कड़ी निंदा की।
- कोर्ट ने ऑडिट आपत्तियों को तीन महीने के भीतर हल करने का निर्देश दिया है।
केरल उच्च न्यायालय ने कोचीन देवस्वम बोर्ड द्वारा एक अधिकारी के आवासीय क्वार्टर और नई कार पर 28.44 लाख रुपये खर्च किए जाने के मामले में गंभीर आपत्ति जताई है। न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी और न्यायमूर्ति के वी जयकुमार की खंडपीठ ने बोर्ड के इस कदम पर "आश्चर्य और निराशा" व्यक्त करते हुए इसे नियमों का स्पष्ट उल्लंघन बताया है।
यह मामला कोचीन देवस्वम आयुक्त एस आर उदयकुमार के आधिकारिक आवास और वाहन पर देवस्वम फंड के कथित दुरुपयोग की शिकायतों से संबंधित है। अदालत ने पाया कि बोर्ड ने एक ऐसे अधिकारी के लिए, जिसकी नियुक्ति सीमित अवधि के लिए प्रतिनियुक्ति पर की गई थी, अत्यधिक खर्च किया जो नियमों और विनियमों के विरुद्ध है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल पेश करता है। जब सार्वजनिक या धार्मिक धन का उपयोग भक्तों की सुविधाओं के बजाय अधिकारियों की व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं के लिए किया जाता है, तो यह संस्थागत विश्वास को कमजोर करता है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि देवस्वम फंड का प्राथमिक उद्देश्य धार्मिक संस्थानों का रखरखाव और भक्तों की सेवा करना है, न कि अधिकारियों की विलासिता।
केरल राज्य ऑडिट विभाग द्वारा प्रस्तुत हलफनामे के अनुसार, कुल खर्च ₹28,44,313 था। इसमें से ₹8,24,738 आवासीय क्वार्टर की मरम्मत पर, ₹1,32,324 बिजली के काम पर, ₹4,23,950 घरेलू सामान और फर्नीचर पर, और ₹14,63,301 एक नई कार खरीदने पर खर्च किए गए। घरेलू सामानों में वाशिंग मशीन, एलईडी टीवी, रेफ्रिजरेटर और एयर कंडीशनर जैसे महंगे उपकरण शामिल थे।
नियमों का उल्लंघन और वाहन विवाद
अदालत ने विशेष रूप से नई मारुति ग्रैंड विटारा की खरीद पर सवाल उठाए। सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, एक वाहन को तभी बदला जा सकता है जब उसने 3 लाख किलोमीटर की दूरी तय कर ली हो या 10 साल पूरे हो गए हों। हालांकि, पुराने वाहन (फोर्ड इकोस्पोर्ट) ने केवल 86,419 किलोमीटर की दूरी तय की थी, जिससे नई कार की खरीद नियमों के विरुद्ध पाई गई।
| खर्च का मद | राशि (रुपये में) | विवरण |
|---|---|---|
| आवासीय मरम्मत | ₹8,24,738 | B1 क्वार्टर का सिविल कार्य |
| घरेलू सामान | ₹4,23,950 | फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण |
| नया वाहन | ₹14,63,301 | मारुति ग्रैंड विटारा |
| अन्य (बिजली आदि) | ₹1,32,324 | विद्युत कार्य |
अदालत ने त्रावणकोर-कोचीन हिंदू धार्मिक संस्थान अधिनियम, 1950 की धारा 73A का हवाला देते हुए कहा कि बोर्ड का कर्तव्य धार्मिक संस्थानों का उचित रखरखाव और भक्तों को सुविधाएं प्रदान करना है। कोर्ट ने बोर्ड को निर्देश दिया है कि वह इस खर्च से संबंधित ऑडिट आपत्तियों को तीन महीने के भीतर अंतिम रूप दे।
Frequently Asked Questions
1. अदालत ने किन खर्चों पर आपत्ति जताई?
अदालत ने अधिकारी के घर के लिए महंगे फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान और नियमों के विरुद्ध नई कार खरीदने पर आपत्ति जताई।
2. वाहन बदलने के नियम क्या थे?
नियमों के अनुसार, वाहन को 3 लाख किमी या 10 साल के बाद ही बदला जा सकता था, जबकि पुराना वाहन केवल 86,419 किमी चला था।