दिल्ली की तिहाड़, रोहिणी और मंडोली जेलें क्षमता से दोगुनी भर गई हैं, जिससे प्रशासन पर भारी दबाव है। इस संकट के समाधान के लिए नवंबर 2027 तक नरेला में एक नया हाई-सिक्योरिटी जेल परिसर बनाने की योजना है।

  • दिल्ली की तीनों जेलों में कैदियों की संख्या उनकी निर्धारित क्षमता से दोगुनी से अधिक हो गई है।
  • नरेला में नया 40 एकड़ का जेल परिसर नवंबर 2027 तक तैयार होने की उम्मीद है।
  • वर्तमान में जेलों में 88% कैदी विचाराधीन (undertrials) हैं।
  • नया परिसर 1,256 कैदियों को समाहित करने में सक्षम होगा, जिसमें हाई-सिक्योरिटी सुविधा भी शामिल है।

दिल्ली की जेल प्रणाली वर्तमान में एक गंभीर संकट से गुजर रही है। तिहाड़, रोहिणी और मंडोली जैसी प्रमुख जेलें अपनी निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक कैदियों को संभाल रही हैं। आंकड़ों के अनुसार, जहां इन जेलों की कुल क्षमता 10,026 कैदियों की है, वहीं 2025 में वहां 20,000 से अधिक कैदी बंद थे। यह स्थिति न केवल सुरक्षा के लिए चुनौती है, बल्कि मानवाधिकारों और जेल प्रबंधन के लिए भी एक बड़ी समस्या बन गई है।

इस दबाव को कम करने के लिए, प्रशासन ने नरेला में एक विशाल 40 एकड़ के जेल परिसर के निर्माण की योजना बनाई है। इस परियोजना का लक्ष्य नवंबर 2027 तक पूरा होना है। इस नए परिसर में 1,256 कैदियों के लिए जगह होगी, जिसमें 256 कैदियों के लिए एक विशेष हाई-सिक्योरिटी ब्लॉक बनाया जा रहा है। यह नया जेल परिसर उच्च-जोखिम वाले अपराधियों को स्थानांतरित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो वर्तमान में अन्य जेलों में अत्यधिक भीड़ का कारण बन रहे हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जेलों में अत्यधिक भीड़ केवल बुनियादी ढांचे की कमी नहीं है, बल्कि यह न्यायिक देरी का भी परिणाम है। जब तक विचाराधीन कैदियों (undertrials) की संख्या को नियंत्रित नहीं किया जाता, तब तक केवल नई जेलें बनाना समस्या का स्थाई समाधान नहीं हो सकता।

जेलों में भीड़भाड़ की समस्या को केवल नए जेल बनाकर हल नहीं किया जा सकता; इसके लिए वास्तविक न्यायिक सुधारों की आवश्यकता है।

जेलों में भीड़ का एक मुख्य कारण यह है कि लगभग 88% कैदी विचाराधीन हैं, यानी उन्हें अभी तक किसी अपराध के लिए सजा नहीं सुनाई गई है। इनमें से 60% कैदी 18 से 30 वर्ष की आयु के बीच हैं। इसके अलावा, जेल प्रशासन को मैनपावर की भी भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। 3,200 स्वीकृत पदों के मुकाबले वर्तमान में केवल 2,500 कर्मी ही कार्यरत हैं।

पुनर्वास और सुधार के प्रयास

प्रशासन केवल जेल बनाने पर ही नहीं, बल्कि कैदियों के सुधार पर भी ध्यान दे रहा है। तिहाड़ जेल की बढ़ईगिरी इकाई अब दिल्ली सरकार और एमसीडी के स्कूलों के लिए फर्नीचर तैयार कर रही है। इसके अलावा, कैदियों को एयर कंडीशनर और पंखे जैसे उपकरणों की मरम्मत का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है ताकि वे जेल से बाहर निकलने के बाद आत्मनिर्भर बन सकें।

विशेषतावर्तमान जेल स्थितिनरेला जेल योजना
कुल क्षमता~10,0261,256 (नया परिसर)
मुख्य समस्याअत्यधिक भीड़ (20,000+ कैदी)हाई-सिक्योरिटी फोकस
कैदी प्रकार88% विचाराधीनहाई-रिस्क शिफ्टिंग

विशेषज्ञों का मानना है कि अर्ध-खुली (semi-open) और खुली (open) जेलों का विस्तार करना भी एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे उन कैदियों को समाज में वापस लौटने के लिए तैयार किया जा सकता है जिन्होंने अच्छा व्यवहार दिखाया है। हालांकि, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि सुधारों के साथ जेलों की संख्या बढ़ाई जाती है, तो यह भ्रष्टाचार और भीड़ का एक अंतहीन चक्र बन सकता है।

Did You Know?: तिहाड़ जेल की वर्कशॉप द्वारा निर्मित फर्नीचर का उपयोग अब दिल्ली के सरकारी स्कूलों में किया जा रहा है।

Frequently Asked Questions

1. नरेला जेल कब तक बनकर तैयार होगी?
प्रशासनिक योजना के अनुसार, नरेला जेल परिसर नवंबर 2027 तक चालू होने की उम्मीद है।

2. दिल्ली की जेलों में जेलर्स की कमी क्यों है?
वर्तमान में स्वीकृत पदों की तुलना में लगभग 700 कर्मियों की कमी है, जिसके लिए जल्द ही नई भर्ती की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।