गुजरात उच्च न्यायालय ने अज़रबैजान में बंधक बनाए गए यात्रियों के मामले में एक कथित एजेंट, ममता गविट को जमानत दे दी है। अदालत ने यह राहत तब दी जब आरोपी ने पीड़ित को 35 लाख रुपये वापस करने का हलफनामा दायर किया।
- गुजरात उच्च न्यायालय ने ममता गविट को नियमित जमानत प्रदान की है।
- आरोपी को 23.50 लाख रुपये छह समान मासिक किश्तों में जमा करने का आदेश दिया गया है।
- अदालत ने पाया कि अज़रबैजान में अपहरण और फिरौती के सीधे आरोपों में गविट की भूमिका नहीं थी।
- यह मामला 'डोंकी रूट' के माध्यम से अवैध प्रवास और अज़रबैजान में यात्रियों के बंधक बनाए जाने से जुड़ा है।
गुजरात के आनंद जिले के दो व्यक्तियों के 'अमेरिकी सपने' का अंत अज़रबैजान में एक भयानक बंधक संकट के रूप में हुआ था। इस बहुचर्चित मामले में, गुजरात उच्च न्यायालय ने कथित एजेंट ममता गविट को नियमित जमानत दे दी है। यह निर्णय तब आया जब गविट ने शिकायतकर्ता को भुगतान की गई 35 लाख रुपये की राशि वापस करने का वचन दिया।
न्यायमूर्ति एच डी सुथार की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए नोट किया कि गविट की अज़रबैजान में यात्रियों के कथित अपहरण, जबरन वसूली या फिरौती की मांगों से कोई सीधी कड़ी नहीं मिली है। अदालत ने स्पष्ट किया कि गविट की भूमिका केवल एक 'वीजा एजेंट' और 'बिचौलिए' के रूप में थी, जो मुख्य आरोपियों और यात्रियों के बीच एक सेतु का काम कर रही थी।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला 'डोंकी रूट' के माध्यम से अवैध प्रवास के बढ़ते खतरों को उजागर करता है। जब युवा बेहतर जीवन की तलाश में अवैध रास्तों का सहारा लेते हैं, तो वे अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी और संगठित अपराध के जाल में फंस जाते हैं, जैसा कि इस मामले में अज़रबैजान में हुआ।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में वित्तीय मुआवजे की शर्त जमानत प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण आधार बन रही है।
मामले की पृष्ठभूमि में ध्रुव पटेल और दीपिका पटेल नामक दो व्यक्तियों का अपहरण शामिल है, जिन्हें अमेरिका जाने के लिए अवैध रास्तों का उपयोग करने के लिए लुभाया गया था। अज़रबैजान में उन्हें बंधक बनाकर प्रताड़ित किया गया और उनके परिवारों से लगभग 65 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई। स्थिति इतनी गंभीर थी कि अपहरणकर्ताओं ने अंगों के अवैध व्यापार की धमकी भी दी थी।
पुलिस जांच के दौरान, आनंद लोकल क्राइम ब्रांच ने महाराष्ट्र से तीन एजेंटों—ममता गविट, केतन रमेश सोनी और डैनियल बैपटिस्ट मोंटेइरो—को गिरफ्तार किया था। गविट को 13 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने पाया कि जांच पूरी हो चुकी है और गविट का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
Frequently Asked Questions
1. ममता गविट को किन शर्तों पर जमानत मिली है?
उसे 23.50 लाख रुपये की शेष राशि छह किश्तों में जमा करनी होगी और अपना पासपोर्ट जमा करना होगा।
2. 'डोंकी रूट' क्या है?
यह अवैध रूप से एक देश से दूसरे देश में प्रवेश करने के लिए उपयोग किए जाने वाले खतरनाक और अनधिकृत रास्तों का एक समूह है।