एर्नाकुलम ग्रामीण पुलिस की विशेष जांच टीम ने एक साहसिक अभियान चलाते हुए ओडिशा के नक्सल प्रभावित क्षेत्र से एक लापता 13 वर्षीय लड़की को सुरक्षित बचाया। पुलिस टीम ने इस मिशन के लिए 4,000 किलोमीटर की कठिन यात्रा तय की।
- एर्नाकुलम ग्रामीण पुलिस की SIT ने ओडिशा के गंजम जिले से लापता किशोरी को सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया।
- मिशन के दौरान पुलिस को नक्सल प्रभावित इलाकों में आधी रात को जंगल के रास्ते पैदल चलना पड़ा।
- जांच के दौरान तमिलनाडु के सलेम से लेकर ओडिशा के घने जंगलों तक पुलिस ने लंबी दूरी तय की।
केरल की एर्नाकुलम ग्रामीण पुलिस ने एक असाधारण साहस का परिचय देते हुए, ओडिशा के गंजम जिले से एक लापता 13 वर्षीय प्रवासी किशोरी को सुरक्षित बचा लिया है। इस मिशन को पूरा करने के लिए पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने लगभग 4,000 किलोमीटर की चुनौतीपूर्ण यात्रा तय की।
घटना की शुरुआत 13 अगस्त, 2026 को हुई, जब कुरुप्पमपाडी पुलिस स्टेशन की सीमा के भीतर रहने वाले एक ओडिशा मूल के दंपति ने अपनी बेटी के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई। शुरुआती तलाशी में कोई सफलता नहीं मिली, जिसके बाद पुलिस ने तकनीकी जांच का सहारा लिया। जांच के दौरान पुलिस को तमिलनाडु के सलेम में काम करने वाले केशव नामक व्यक्ति का सुराग मिला, जिसने किशोरी की एक अन्य युवक के साथ दोस्ती की बात स्वीकार की।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला न केवल एक सफल पुलिस ऑपरेशन है, बल्कि अंतर-राज्यीय अपराधों और प्रवासी समुदायों की सुरक्षा के बीच बढ़ते जटिल संबंधों को भी दर्शाता है। पुलिस द्वारा अपनाया गया यह रणनीतिक दृष्टिकोण भविष्य के लापता मामलों में एक मिसाल बन सकता है।
जिला पुलिस प्रमुख के.एस. सुदर्शन के नेतृत्व में गठित SIT ने जब किशोरी का पता ओडिशा के गंजम जिले में लगाया, तो चुनौतियां और भी बढ़ गईं। गंजम का वह क्षेत्र नक्सल प्रभावित था, जिसके कारण स्थानीय भंजनगर पुलिस ने सुरक्षा कारणों से दिन के समय पुलिस वाहनों में वहां प्रवेश करने की चेतावनी दी थी।
पुलिस ने जोखिम उठाते हुए आधी रात को जंगल के रास्ते पैदल चलकर इस मिशन को अंजाम दिया।
SIT के सदस्यों ने बताया कि उन्होंने सुरक्षा के लिए स्थानीय पुलिस के आठ सशस्त्र जवानों के साथ मिलकर आधी रात को ऑपरेशन शुरू किया। टीम ने ध्यान आकर्षित न करने के लिए अपने वाहनों को एक किलोमीटर दूर पार्क किया और घने जंगलों के बीच से 40 किलोमीटर तक पैदल मार्च किया।
जब टीम संदिग्ध आलोक के घर पहुंची, तो स्थानीय लोगों के साथ तीखी बहस भी हुई, लेकिन पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए किशोरी को सुरक्षित बचा लिया। इस सफल टीम में सब-इंस्पेक्टर के.एम. अबी और पुलिस अधिकारी एन.पी. बिंदू, अरुण के. करुण और राजिथ राम शामिल थे।
Frequently Asked Questions
1. किशोरी को कहाँ से बरामद किया गया?
किशोरी को ओडिशा के गंजम जिले के एक नक्सल प्रभावित क्षेत्र से बरामद किया गया।
2. पुलिस टीम ने इस मिशन में क्या जोखिम उठाया?
पुलिस टीम को घने जंगलों में आधी रात को पैदल चलना पड़ा और नक्सल प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा जोखिमों का सामना करना पड़ा।