पटना उच्च न्यायालय ने 'महाबिरी जुलूस' में भक्तों की संख्या बढ़ाने की याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि धार्मिक स्वतंत्रता पूर्ण नहीं है और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना सर्वोपरि है।

  • पटना उच्च न्यायालय ने धार्मिक जुलूस में भक्तों की संख्या बढ़ाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया।
  • न्यायालय ने कहा कि धार्मिक अधिकार 'सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य' के अधीन हैं।
  • अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान केवल उन प्रथाओं की रक्षा करता है जो धर्म के लिए 'अनिवार्य और अभिन्न' हैं।

पटना उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि धार्मिक जुलूस निकालने का अधिकार सुरक्षित तो है, लेकिन यह सार्वजनिक व्यवस्था और उचित प्रतिबंधों के अधीन है। न्यायालय ने 'महाबिरी जुलूस' में शामिल होने वाले भक्तों की संख्या बढ़ाने की मांग करने वाली एक याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें कम से कम 300 भक्तों को अनुमति देने की मांग की गई थी।

न्यायमूर्ति आलोक कुमार ने अपने आदेश में टिप्पणी की कि राज्य को सभी धर्मों के प्रति तटस्थ रहना चाहिए और हर विश्वास के साथ समान व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने कहा, "संविधान के अनुच्छेद 19(1)(b) और 25 के तहत धार्मिक प्रथाओं का अधिकार प्राप्त है, लेकिन यह अधिकार पूर्ण (absolute) नहीं है। संवैधानिक संरक्षण केवल उन्हीं प्रथाओं तक सीमित है जो किसी धर्म के लिए अनिवार्य और अभिन्न हैं।"

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह निर्णय भारत में धार्मिक स्वतंत्रता और नागरिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल कायम करता है। यह स्पष्ट करता है कि व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता को सामूहिक सार्वजनिक कल्याण और राष्ट्रीय सुरक्षा के ऊपर नहीं रखा जा सकता।

कोई भी संवैधानिक अधिकार पूर्ण नहीं है; अनियंत्रित स्वतंत्रता समाज के लिए बहुत बड़ा खतरा पैदा कर सकती है।

मामले के तथ्यों के अनुसार, सिवान जिले के हठाउरा गांव के 'अखाड़ा नंबर 1' के एक भक्त ने याचिका दायर की थी। उनका तर्क था कि 1958 से इस जुलूस की अनुमति मिल रही थी, लेकिन पुलिस ने धीरे-धीरे भक्तों की संख्या कम कर दी। 2012-13 में जहाँ 200 भक्त शामिल होते थे, वहीं 2023 से पुलिस ने संख्या घटाकर मात्र 5 कर दी और पारंपरिक मार्ग भी बदल दिया।

याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि पुलिस ने कानून-व्यवस्था के डर से अनुचित तरीके से प्रतिबंध लगाए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस अन्य समुदायों के जुलूसों के प्रति भेदभावपूर्ण व्यवहार कर रही है। हालांकि, राज्य सरकार ने दलील दी कि 2015 और 2022 के बीच भीड़ अनियंत्रित हो गई थी, जिससे सरकारी वाहनों को नुकसान पहुँचा और पुलिस पर पथराव किया गया था।

Did You Know?: महाबिरी जुलूस उत्तर प्रदेश और बिहार में सदियों पुरानी परंपरा है, जिसमें भगवान हनुमान के सम्मान में मार्शल आर्ट और हथियारों का प्रदर्शन किया जाता है।

Frequently Asked Questions

1. क्या धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार पूर्ण है?
नहीं, भारतीय संविधान के तहत धार्मिक स्वतंत्रता सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन है।

2. पटना हाईकोर्ट ने इस मामले में क्या मुख्य सिद्धांत दिया?
अदालत ने कहा कि राज्य को व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सामूहिक सार्वजनिक कल्याण के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिए।