प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जयपुर में एक पास्टर के ठिकानों पर छापेमारी की है, जिस पर ₹2.88 करोड़ की अवैध विदेशी फंडिंग और दलितों व आदिवासियों के बीच धर्मांतरण कराने का गंभीर आरोप है।
- जयपुर में पास्टर रवि मोहन पहाड़िया के दो ठिकानों पर ED की छापेमारी।
- बिना FCRA पंजीकरण के ₹2.88 करोड़ की अवैध विदेशी फंडिंग का आरोप।
- दलित और आदिवासी समुदायों के बीच धर्मांतरण गतिविधियों का संदिग्ध मामला।
- फंड का उपयोग व्यक्तिगत संपत्ति और विदेश यात्राओं के लिए करने का संदेह।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एक पास्टर से जुड़े दो ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई कथित तौर पर विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA), 1999 के उल्लंघन और अवैध विदेशी धन प्राप्त करने के संदेह में की गई है।
ED के अनुसार, पास्टर रवि मोहन पहाड़िया, जो 'होप मिनिस्ट्री' से जुड़े एक प्रोटेस्टेंट मिशनरी हैं, पर आरोप है कि उन्होंने जयपुर और दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी क्षेत्रों में धर्मांतरण गतिविधियों के लिए अवैध रूप से विदेशी धन प्राप्त किया। जांच में सामने आया है कि पहाड़िया और उनकी पत्नी गुंजन शर्मा ने बिना किसी FCRA (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) पंजीकरण के लगभग ₹2.88 करोड़ की राशि प्राप्त की।
धोखाधड़ी का तरीका
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस भारी भरकम राशि को प्राप्त करने के लिए गलत तरीके अपनाए गए। ED का कहना है कि उन्होंने इस धन को 'बिजनेस और मैनेजमेंट कंसल्टेंसी' तथा 'पब्लिक रिलेशंस सर्विसेज' के रूप में दिखाकर प्राप्त किया। इसके अलावा, कुछ राशि को गैर-निवासी भारतीयों (NRI) से पारिवारिक रखरखाव और बचत के रूप में दिखाया गया, जबकि वास्तविक उद्देश्य कुछ और था।
मुख्य संदिग्ध विदेशी डोनर के रूप में अमेरिका स्थित थॉमस यूजीन लिंच का नाम सामने आया है, जिससे पहाड़िया ने लगभग ₹2.20 करोड़ प्राप्त किए। ED ने बताया कि इस धन का उपयोग व्यक्तिगत खर्चों, विदेशी यात्राओं और अपने नाम पर संपत्ति खरीदने के लिए किया गया।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता का नहीं है, बल्कि यह देश के संवेदनशील सामाजिक ताने-बाने और धार्मिक सुरक्षा कानूनों के उल्लंघन से जुड़ा है। FCRA नियमों का उल्लंघन और वंचित समुदायों को लक्षित करना राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता के दृष्टिकोण से एक गंभीर चिंता का विषय है।
विदेशी फंडिंग का उपयोग धार्मिक गतिविधियों के लिए करना और उसे व्यावसायिक सेवाओं के रूप में दिखाना कानून की आंखों में धूल झोंकने का एक सुनियोजित प्रयास है।
ED ने छापेमारी के दौरान विभिन्न महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं। प्रारंभिक जांच से यह भी संकेत मिलता है कि पास्टर विदेशी नागरिकों के निरंतर संपर्क में हैं और उनके निर्देशों पर विभिन्न राज्यों के आदिवासी और वंचित समुदायों के बीच धार्मिक सभाएं आयोजित कर रहे हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) को इसलिए लागू किया गया था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विदेशी धन का उपयोग केवल उन्हीं उद्देश्यों के लिए किया जाए जिनके लिए अनुमति दी गई है। पिछले कुछ वर्षों में, कई गैर-सरकारी संगठनों और धार्मिक संस्थाओं पर इस कानून के उल्लंघन और अवैध धर्मांतरण के माध्यम से सामाजिक अस्थिरता पैदा करने के आरोप लगे हैं।
Frequently Asked Questions
1. ED ने जयपुर में किन पर छापेमारी की है?
ED ने पास्टर रवि मोहन पहाड़िया और उनकी पत्नी गुंजन शर्मा के ठिकानों पर छापेमारी की है।
2. अवैध फंडिंग का मुख्य स्रोत क्या बताया जा रहा है?
जांच के अनुसार, मुख्य रूप से अमेरिका स्थित डोनर थॉमस यूजीन लिंच से अवैध धन प्राप्त किया गया था।