मद्रास उच्च न्यायालय ने पूर्व केंद्रीय मंत्री ए. राजा की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने CBI को संपत्ति मामले से जुड़े दस्तावेज पेश करने का निर्देश देने की मांग की थी। न्यायमूर्ति जी.के. इलंथिरैयान ने विशेष अदालत के पिछले फैसले को बरकरार रखा है।
- मद्रास उच्च न्यायालय ने पूर्व केंद्रीय मंत्री ए. राजा की याचिका को खारिज कर दिया है।
- न्यायालय ने CBI को संपत्ति मामले से संबंधित अतिरिक्त दस्तावेज पेश करने का निर्देश देने से इनकार किया।
- यह मामला 2015 में दर्ज भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामले से संबंधित है।
- विशेष अदालत ने पहले ही राजा की इसी तरह की मांग को खारिज कर दिया था।
मद्रास उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री और DMK सांसद ए. राजा की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को उनके खिलाफ दर्ज आय से अधिक संपत्ति के मामले में कुछ विशिष्ट दस्तावेज पेश करने का निर्देश देने की मांग की थी।
न्यायमूर्ति जी.के. इलंथिरैयान ने याचिकाकर्ता के वकील और CBI के विशेष लोक अभियोजक के तर्कों को सुनने के बाद इस आपराधिक मूल याचिका को खारिज कर दिया। ए. राजा ने इस मामले में उच्च न्यायालय का दरवाजा तब खटखटाया था, जब चेन्नई की विशेष MP/MLA अदालत ने 8 दिसंबर, 2025 को उनकी इसी तरह की एक याचिका को खारिज कर दिया था।
मामले की पृष्ठभूमि
यह पूरा विवाद 2009 में 2G स्पेक्ट्रम आवंटन के दौरान शुरू हुआ था, जिसमें ए. राजा पर प्रथम आगमन के आधार पर स्पेक्ट्रम आवंटित करने और कथित तौर पर कम कीमतों पर सौदा करने का आरोप लगा था। इसके बाद, 2015 में, CBI की भ्रष्टाचार विरोधी शाखा ने ए. राजा, उनकी पत्नी एम.ए. परमेश्वरी और उनके सहयोगियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एक अलग FIR दर्ज की थी।
आरोप है कि 13 अक्टूबर 1999 से 30 सितंबर 2010 के बीच, जब राजा विभिन्न मंत्रालयों में मंत्री थे, उन्होंने अपने ज्ञात आय स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की थी। CBI के अनुसार, इस अवधि के दौरान उनकी संपत्ति ₹2.2 लाख से बढ़कर ₹5.90 करोड़ हो गई थी, जिसमें से ₹5.53 करोड़ को आय से अधिक माना गया है।
BozokMedia विश्लेषण: कानूनी पेच और प्रभाव
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह निर्णय कानूनी प्रक्रिया में जांच एजेंसी की स्वायत्तता और आरोपी के बचाव के अधिकार के बीच संतुलन को दर्शाता है। अदालत का मानना है कि केवल दस्तावेजों की मांग करना बचाव का पर्याप्त आधार नहीं है, जब तक कि वे सीधे तौर पर आरोपों को चुनौती न दें।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि दस्तावेजों की अनुपलब्धता का तर्क केवल आरोप तय करने की प्रक्रिया में बाधा नहीं बन सकता यदि आरोपी के पास अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं।
ए. राजा का तर्क था कि CBI ने 2015 में उनके द्वारा दिए गए एक प्रतिनिधित्व (representation) और दिल्ली तथा चेन्नई शाखाओं के बीच हुए पत्राचार को अदालत के सामने पेश नहीं किया है। हालांकि, विशेष अदालत ने इसे महत्वहीन माना और कहा कि आरोपी के पास अपनी बात रखने के लिए स्वतंत्र रूप से दस्तावेज पेश करने का अवसर हमेशा रहता है।
Frequently Asked Questions
1. ए. राजा पर मुख्य आरोप क्या हैं?
ए. राजा पर 2G स्पेक्ट्रम आवंटन के बाद अपनी आय के ज्ञात स्रोतों से ₹5.53 करोड़ की अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है।
2. उच्च न्यायालय ने याचिका क्यों खारिज की?
न्यायालय ने माना कि CBI द्वारा कुछ पुराने पत्राचार प्रस्तुत न करना आरोप तय करने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बाधा नहीं है।