दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने एक अंतरराज्यीय साइबर अपराध गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने एक सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी को 'डिजिटल अरेस्ट' के माध्यम से 30 लाख रुपये का चूना लगाया। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है जिसका बैंक खाता कई अन्य धोखाधड़ी मामलों से जुड़ा है।
- साइबर अपराधियों ने ATS, NIA और RBI के अधिकारियों बनकर पीड़ित को डराया।
- पीड़ित को दिल्ली के लाल किले विस्फोट से जुड़े टेरर फंडिंग मामले में फंसाने का झूठा आरोप लगाया गया।
- पुलिस ने आरोपी सुनील सिंगला को गिरफ्तार किया है, जिसका संबंध अन्य सात साइबर अपराधों से है।
- ठगी गई राशि में से 12 लाख रुपये की रिकवरी या रिफंड कर दिए गए हैं।
दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने रविवार को एक बड़े साइबर धोखाधड़ी मामले का खुलासा करते हुए बताया कि एक अंतरराज्यीय साइबर अपराध गिरोह ने एक सेवानिवृत्त भारतीय रेलवे कर्मचारी को ₹30 लाख की चपत लगाई है। अपराधियों ने खुद को आतंकवाद विरोधी दस्ते (ATS), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के उच्चाधिकारियों के रूप में पेश किया और पीड़ित को 'डिजिटल अरेस्ट' की स्थिति में रखकर डराया-धमकाया।
द्वारका निवासी इस सेवानिवृत्त कर्मचारी को फोन कॉल और व्हाट्सएप वीडियो कॉल के माध्यम से निशाना बनाया गया। जालसाजों ने उसे यह विश्वास दिला दिया कि उसका नाम दिल्ली के लाल किले विस्फोट से जुड़े टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आया है। अपराधियों ने मामले को विश्वसनीय बनाने के लिए व्हाट्सएप पर फर्जी गोपनीयता समझौते, RBI पुष्टिकरण और कानूनी बॉन्ड जैसे जाली दस्तावेज भेजे।
अपराध का तरीका: मनोवैज्ञानिक दबाव
अपराधियों ने पीड़ित को निरंतर वीडियो कॉल और कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से निगरानी में रखा। इस मनोवैज्ञानिक दबाव का उद्देश्य पीड़ित को यह सोचने पर मजबूर करना था कि वह कानूनी कार्रवाई के कगार पर है। इस दौरान अपराधियों ने पीड़ित से उसके बैंक खातों, सावधि जमा (FD) और अन्य संपत्तियों के विवरण मांगे। अंततः, डरे हुए कर्मचारी ने अपने फंड को समाप्त कर दिया और RTGS के माध्यम से ₹30 लाख गिरोह द्वारा नियंत्रित खातों में स्थानांतरित कर दिए।
साइबर अपराधी अब केवल तकनीकी सेंधमारी नहीं कर रहे, बल्कि वे कानून प्रवर्तन एजेंसियों के नाम का उपयोग करके लोगों के मनोवैज्ञानिक डर का फायदा उठा रहे हैं।
बोज़ोकमीडिया विश्लेषण: जांच और गिरफ्तारी
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल एक व्यक्तिगत ठगी नहीं, बल्कि एक संगठित अंतरराज्यीय नेटवर्क का हिस्सा है। पुलिस जांच के दौरान बैंकिंग ट्रेल और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण करने पर पता चला कि ठगी गई राशि में से ₹15 लाख 'M/s Shri Balaji Tractor' नामक एक खाते में भेजे गए थे, जिसे हरियाणा के फतेहाबाद निवासी सुनील सिंगला संचालित कर रहा था।
पुलिस ने सुनील सिंगला को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में यह भी सामने आया है कि सिंगला का खाता विभिन्न राज्यों में दर्ज सात अन्य साइबर धोखाधड़ी के मामलों से भी जुड़ा हुआ था। सिंगला को पहले भी दिल्ली पुलिस की विशेष सेल (IFSO) द्वारा एक अन्य साइबर धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: डिजिटल अरेस्ट का बढ़ता खतरा
पिछले कुछ महीनों में भारत में 'डिजिटल अरेस्ट' के मामलों में भारी वृद्धि देखी गई है। इसमें अपराधी पुलिस, सीबीआई या अन्य जांच एजेंसियों का रूप धरकर पीड़ित को वीडियो कॉल पर 'गिरफ्तार' होने का नाटक करते हैं और तब तक कॉल नहीं काटते जब तक कि पीड़ित डर के मारे पैसे न दे दे। यह एक नया और बेहद खतरनाक साइबर अपराध का रूप ले चुका है।
Frequently Asked Questions
1. डिजिटल अरेस्ट क्या है?
यह एक प्रकार की साइबर धोखाधड़ी है जहाँ अपराधी कानून प्रवर्तन एजेंसी बनकर पीड़ित को वीडियो कॉल पर डराते हैं और उन्हें 'डिजिटल रूप से गिरफ्तार' होने का भ्रम देते हैं।
2. यदि मेरे साथ ऐसी ठगी हो जाए तो क्या करें?
तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।