दिल्ली हाई कोर्ट ने विरेंद्र देव दीक्षित के आश्रयों की प्रबंधन जिम्मेदारी पर जांच का आदेश दिया, जबकि एक महिला का लापता होना और वित्तीय लेन‑देनों पर सवाल उठे हैं। कोर्ट ने राज्य की हस्‍तक्षेप की संभावना भी जताई।

  • आश्रयों की प्रबंधन जिम्मेदारी पर हाई कोर्ट ने जांच का आदेश दिया
  • एक महिला का लापता होना और संभावित नशीले पदार्थों के प्रयोग की शिकायतें
  • आर्थिक लेन‑देनों पर आयकर विभाग को जांच करने से रोकने वाले प्रश्न उठे

दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को कहा कि स्व‑घोषित आध्यात्मिक प्रवक्ता विरेंद्र देव दीक्षित से जुड़े आश्रयों का प्रबंधन अब किसके दायित्व में है, इस पर विस्तृत जांच आवश्यक है। यह बयान कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायाधीश तेजस करिया द्वारा सुनवाई के दौरान दिया गया।

सुनवाई में बताया गया कि आध्यात्मिक विश्व विद्यालय आश्रम, रोहिणी में कई महिलाओं और नाबालिग लड़कियों को अवैध रूप से बंदी बनाकर रखा गया था। यह मामला 2017 में सामाजिक सशक्तिकरण फाउंडेशन (NGO) द्वारा दायर किया गया था, जिसने न्यायालय से माँ‑बेटी को मिलन से रोकने का आरोप लगाया।

कोर्ट ने विजय विहार पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस अफसर को लापता व्यक्ति के केस को दर्ज करने और तुरंत जांच शुरू करने का निर्देश दिया, जब आश्रम में रह रही महिलाओं ने बताया कि एक निवासी गायब है जबकि उसके सामान अभी भी परिसर में मौजूद हैं। साथ ही, सीबीआई ने बताया कि दीक्षित कई वर्षों से फरार थे और अब उनका निधन हो चुका है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शिता की कमी से सामाजिक सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है, और इस तरह की जांचें सार्वजनिक विश्वास को पुनर्स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

"आश्रय प्रबंधन में जवाबदेही की कमी न केवल महिलाओं के अधिकारों को खतरे में डालती है, बल्कि सम्पूर्ण सामाजिक ढाँचा भी कमजोर करती है," एक कानूनी विशेषज्ञ ने कहा।

कोर्ट ने आश्रमों के वित्तीय लेन‑देनों पर भी सवाल उठाए और आयकर विभाग को उनके खातों की जाँच करने से रोकने वाले कारणों पर स्पष्टीकरण मांगा। यह संकेत देता है कि आश्रमों के आय स्रोतों में संभावित अनियमितताएँ हो सकती हैं।

Did You Know?: विरेंद्र देव दीक्षित ने 2000 के दशक में कई बड़े शहरों में अपने अनुयायियों के साथ कई आश्रम स्थापित किए थे, जिनमें से कई अभी भी विवादास्पद हैं।

पुलिस को 31 अगस्त तक जांच पूरी करके उसके परिणाम न्यायालय में प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है। यदि कोई संस्था या व्यक्ति इस जिम्मेदारी को स्वीकार नहीं करता, तो राज्य को हस्तक्षेप करना पड़ सकता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: आश्रम में लापता महिला के बारे में वर्तमान में क्या जानकारी उपलब्ध है?
उत्तर: महिला ने वीडियो कॉल के माध्यम से अपने परिवार से संपर्क किया, परंतु वह परामर्श के बावजूद आश्रम छोड़ने से इंकार कर रही है।

प्रश्न 2: क्या आयकर विभाग ने आश्रम की जांच शुरू कर दी है?
उत्तर: अभी तक आयकर विभाग ने आधिकारिक तौर पर जांच शुरू नहीं की है; कोर्ट ने इसे आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है।