दिल्ली पुलिस ने लक्ष्मी नगर में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है, जहाँ एयरलाइन में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से पैसे ऐंठे जा रहे थे। इस मामले में दो महिलाओं सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
- दिल्ली के लक्ष्मी नगर में संचालित फर्जी कॉल सेंटर का पुलिस ने किया भंडाफोड़।
- एयरलाइन में ग्राउंड-ड्यूटी नौकरी दिलाने के नाम पर UPI के जरिए ठगी की जाती थी।
- मोहम्मद ज़ैद, सदाफ और तनीषा नामक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
- पुलिस ने छापेमारी के दौरान कई स्मार्टफोन, सिम कार्ड और नकदी बरामद की है।
दिल्ली पुलिस ने पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर इलाके में एक बड़े फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह एयरलाइन कंपनियों के एचआर (HR) प्रतिनिधि बनकर बेरोजगार युवाओं को नौकरी का झांसा देता था और फिर पंजीकरण शुल्क के नाम पर उनसे मोटी रकम वसूलता था। पुलिस ने इस मामले में दो महिलाओं सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।
मामले का खुलासा तब हुआ जब छत्तीसगढ़ के एक निवासी ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित को बताया गया था कि उसे एयरलाइन में नौकरी मिल सकती है, जिसके बदले उसे 14,000 रुपये देने होंगे। जैसे ही पीड़ित ने UPI के माध्यम से 14,500 रुपये ट्रांसफर किए, उसे अहसास हुआ कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है।
जांच और गिरफ्तारी का क्रम
पूर्वी दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (DCP) राजीव कुमार ने बताया कि जांच के दौरान पुलिस ने पैसों के लेन-देन के रास्ते का पता लगाया। मनी ट्रेल से पता चला कि धोखाधड़ी की गई राशि को पूर्वी दिल्ली के एक एटीएम से निकाला गया था। बैंक खाते की जांच करने पर पुलिस को आरोपी मोहम्मद ज़ैद (30 वर्ष) के नाम पर खाता मिला, जिसे लक्ष्मी नगर से गिरफ्तार कर लिया गया। ज़ैद की पूछताछ के आधार पर पुलिस ने सदाफ (24 वर्ष) और तनीषा (21 वर्ष) को भी धर दबोचा।
यह गिरोह बेहद पेशेवर तरीके से काम कर रहा था, जो युवाओं की नौकरी की तलाश का फायदा उठाकर डिजिटल माध्यमों से ठगी कर रहा था।
BozokMedia विश्लेषण: डिजिटल धोखाधड़ी का नया पैटर्न
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि अपराधी अब पारंपरिक तरीकों को छोड़कर पूरी तरह से डिजिटल पेमेंट और सोशल इंजीनियरिंग का सहारा ले रहे हैं। आरोपी विभिन्न मोबाइल नंबरों का उपयोग करते थे और खुद को प्रतिष्ठित एयरलाइन कंपनियों के कर्मचारी के रूप में पेश करते थे। पुलिस को छापेमारी के दौरान छह स्मार्टफोन, तीन कीपैड फोन और कई सिम कार्ड मिले हैं, जो इस बात का प्रमाण हैं कि यह एक संगठित नेटवर्क था।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी सदाफ पिछले तीन महीनों से इस फर्जी कॉल सेंटर को चला रही थी। आरोपियों की पृष्ठभूमि भी चौंकाने वाली है; आरोपी ज़ैद स्कूल ड्रॉपआउट है, जबकि सदाफ स्नातक की पढ़ाई बीच में छोड़ चुकी है। यह दर्शाता है कि कैसे शिक्षित युवा भी अपराध की दुनिया में कदम रख रहे हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: साइबर अपराध का बढ़ता ग्राफ
पिछले कुछ वर्षों में भारत में 'जॉब स्कैम' या नौकरी के नाम पर होने वाली ठगी में भारी वृद्धि हुई है। जैसे-जैसे डिजिटल भुगतान (UPI) आसान हुआ है, अपराधियों ने इसका उपयोग शिकार को तुरंत पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करने में किया है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि फर्जी एचआर कॉल और सोशल मीडिया पर नौकरी के विज्ञापनों के माध्यम से होने वाली यह ठगी अब एक वैश्विक समस्या बनती जा रही है।
Frequently Asked Questions
1. इस तरह की ठगी से कैसे बचें?
कभी भी नौकरी पाने के लिए किसी अनजान व्यक्ति को UPI या बैंक ट्रांसफर के जरिए पैसे न दें। आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ही नौकरी की पुष्टि करें।
2. यदि मेरे साथ धोखाधड़ी हो जाए तो क्या करें?
तुरंत 1930 डायल करें या www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।