प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ₹30,000 करोड़ के कथित अखिल भारतीय साइबर धोखाधड़ी और 'डिजिटल अरेस्ट' मामले में मुंबई से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस नेटवर्क ने देशभर में सैकड़ों लोगों को अपना शिकार बनाया है।

  • मुंबई से फहीम मोइन हुसैन सैयद और नइम मुईन सैयद को गिरफ्तार किया गया।
  • मामले में ₹30,000 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन का अनुमान है।
  • यह धोखाधड़ी 'डिजिटल अरेस्ट' और फर्जी 'सीक्रेट सुपरविजन खातों' के माध्यम से की गई।
  • जांच में 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 150-160 FIR दर्ज होने का पता चला है।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भारत के सबसे बड़े साइबर धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क में से एक का पर्दाफाश करते हुए मुंबई से दो व्यक्तियों को हिरासत में लिया है। आरोपियों की पहचान फहीम मोइन हुसैन सैयद और नइम मुईन सैयद के रूप में हुई है, जिन्हें 23 अगस्त, 2026 को गिरफ्तार किया गया।

यह जांच एक गोवा की महिला के साथ हुई ₹2.60 करोड़ की धोखाधड़ी के बाद शुरू हुई थी। जालसाजों ने महिला को 'डिजिटल अरेस्ट' का डर दिखाकर कुछ तथाकथित 'सीक्रेट सुपरविजन खातों' में पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, ED ने मुंबई की एक विशेष PMLA अदालत में आरोपियों को पेश किया, जहां से उन्हें गोवा ले जाने के लिए ट्रांजिट रिमांड दे दी गई है।

बड़ा वित्तीय जाल और कार्यप्रणाली

जांच के दौरान, ED ने पाया कि धोखाधड़ी से प्राप्त धन को विभिन्न बैंक खातों में स्थानांतरित किया गया, फिर नकद निकाला गया और अंततः RBI-लाइसेंस प्राप्त मनी चेंजर्स के माध्यम से विदेशी मुद्रा में बदल दिया गया। BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि यह नेटवर्क अत्यधिक संगठित था, जिसमें ₹27,000 करोड़ के बैंक लेनदेन और ₹3,000 करोड़ के नकद लेनदेन शामिल होने का संदेह है।

साइबर अपराधियों ने डिजिटल अरेस्ट के मनोवैज्ञानिक डर का उपयोग करके बैंकिंग प्रणाली की खामियों का फायदा उठाया है।

यह आपराधिक नेटवर्क केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले में 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 300 पीड़ितों की शिकायतें और 150 से 160 FIR दर्ज की जा चुकी हैं। कुल धोखाधड़ी की राशि लगभग ₹4,000 करोड़ होने का अनुमान है।

शेल कंपनियों का मायाजाल

ED की जांच में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। इस घोटाले में शामिल 'शेल' या डमी कंपनियों के निदेशक ऐसे लोगों के नाम पर थे जो बेहद साधारण परिस्थितियों में रहते थे। जांच में पाया गया कि इन कंपनियों के कथित निदेशकों और कर्मचारियों के पास रहने के लिए केवल एक कमरे के आवास थे, जो इस तरह के बड़े पैमाने पर होने वाले वित्तीय अपराधों का एक क्लासिक 'मोडस ऑपरेंडी' है।

Did You Know?: 'डिजिटल अरेस्ट' एक नया साइबर अपराध है जहाँ अपराधी खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताकर पीड़ित को वीडियो कॉल पर डराते हैं और उन्हें तब तक घर में कैद रहने का निर्देश देते हैं जब तक वे पैसे न दे दें।

Frequently Asked Questions

1. 'डिजिटल अरेस्ट' क्या है?
यह एक प्रकार का साइबर फ्रॉड है जिसमें अपराधी खुद को कानून प्रवर्तन अधिकारी बताकर पीड़ित को डराते हैं और उन्हें फोन या वीडियो कॉल पर 'गिरफ्तारी' के नाम पर बंधक बना लेते हैं।

2. ED इस मामले में क्या कार्रवाई कर रही है?
ED आरोपियों से पूछताछ करने, मनी लॉन्ड्रिंग के रास्तों का पता लगाने और जब्त की गई राशि के माध्यम से नेटवर्क के अन्य सदस्यों को पकड़ने के लिए विस्तृत जांच कर रही है।