एनफ़ोर्समेंट डायरेक्टरेटरी ने मुंबई में 30,000 करोड़ रुपये के डिजिटल गिरफ्तारी जाल से जुड़े दो पुरुषों को गिरफ्तार किया। जांच के अनुसार 300 से अधिक पीड़ितों और 150‑160 FIRs शामिल हैं।

  • ED ने दो मुख्य आरोपी को हिरासत में लिया
  • जाल में 30,000 करोड़ रुपये के लेन‑देन शामिल
  • शेल कंपनियों और विदेशी मुद्रा चैनलों का इस्तेमाल किया गया

एनफ़ोर्समेंट डायरेक्टरेटरी (ED) ने मुंबई में फहिम मोइन हुसैन सेयद और नैम मु एन् सेयद को 30,000 करोड़ रुपये के डिजिटल गिरफ्तारी जाल से जुड़े धनशोधन मामले में गिरफ्तार किया। यह जाल पैन‑इंडिया स्तर पर संचालित माना जा रहा है, जिसमें लगभग 300 शिकायतें और 20 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में 150‑160 FIRs दर्ज हैं।

जाँच का आरम्भ तब हुआ जब गोवा की एक महिला को मई‑जून 2025 में “सीक्रेट सुपरविजन अकाउंट” में 2.60 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया, जिसे डिजिटल गिरफ्तारी कहा जाता है। इस केस ने एक व्यापक नेटवर्क को उजागर किया जो शेल फर्मों, नकद निकासी और RBI‑लाइसेंसधारी मनी चेंजरों के माध्यम से धन को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा में बदलता था।

ED ने इस आरोपी को विशेष पैसे धुंधला रोकथाम अधिनियम (PMLA) कोर्ट में पेश किया और उन्हें गोवा के पनाजी में ट्रांसिट रिमांड दिया गया। आगे की जाँच में पता चला कि इस नेटवर्क ने लगभग 27,000 करोड़ रुपये बैंक ट्रांसफ़र और 3,000 करोड़ रुपये नकद लेन‑देन किए थे, जबकि कुल धोखाधड़ी का अनुमान 4,000 करोड़ रुपये का है।

जाँच के दौरान लगभग 3.25 करोड़ रुपये नकद जब्त किया गया। साथ ही, शेल कंपनियों के डायरेक्टर के रूप में केवल एक कमरे में रहने वाले ड्राइवर और कर्मचारियों को सूचीबद्ध किया गया, जो इस जाल की संचालन पद्धति का हिस्सा माना जा रहा है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

डिजिटल गिरफ्तारी जाल की अवधारणा पहले 2022 में उभर कर आई थी, जब कई राज्य पुलिस विभागों ने इंटरनेट‑आधारित धोखाधड़ी के मामलों में वृद्धि दर्ज की थी। इस प्रकार के जाल में पीड़ितों को ऑनलाइन धमकियों या वैध लगने वाले वित्तीय निर्देशों के माध्यम से फंसाया जाता है, जिससे वे बड़े पैमाने पर धन स्थानांतरित कर देते हैं।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the scale of this cyber‑fraud network, spanning multiple states and involving sophisticated money‑laundering techniques, poses a serious threat to India’s financial ecosystem and underscores the urgent need for stronger cyber‑law enforcement.

"ऐसे जटिल नेटवर्क को तोड़ने के लिए अंतर‑एजेंसी सहयोग और तकनीकी क्षमताओं का विकास आवश्यक है," कहा साइबर‑क्राइम विशेषज्ञ डॉ. अजय सिंह ने।
Did You Know?: भारत में डिजिटल जाल से जुड़े प्रथम बड़े मामले 2020 में उजागर हुए थे, जिन्होंने लगभग 1,200 करोड़ रुपये की हानि पहुंचाई थी।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या इस जाल में अन्य राज्य भी शामिल हैं?

उत्तर: हाँ, जांच के अनुसार 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पीड़ितों की शिकायतें दर्ज हैं।

प्रश्न 2: ED इस मामले में आगे कौन‑सी कार्रवाई करेगी?

उत्तर: अभियुक्तों को पनाजी में विशेष कोर्ट में पेश किया जाएगा और आगे की पूछ‑ताछ तथा संपत्ति की बरामदगी की संभावना है।