एक हरेआणा परिवार को दार्जिलिंग‑गंगटोक यात्रा के दौरान होटल ने उनके कुत्ते के कारण ठहराव से इनकार किया, जिससे उन्हें आठ घंटे का सफ़र करना पड़ा। रोहतक उपभोक्ता आयोग ने यात्रा एजेंसी को कुल ₹1,08,000 (रिफंड + मुआवजा) देने का आदेश दिया। यह मामला उपभोक्ता अधिकारों और पालतू‑संबंधी नीतियों पर नया प्रकाश डालता है।
- होटल ने कुत्ते के कारण ठहराव से इनकार किया, परिवार को 8 घंटे अतिरिक्त यात्रा करनी पड़ी
- रोहतक उपभोक्ता आयोग ने एजेंसी को ₹93,000 रिफंड, ₹10,000 मुआवजा और ₹5,000 कानूनी खर्च वसूले
- केस ने यात्रा पैकेज में पालतू‑समावेशी शर्तों की स्पष्टता की आवश्यकता उजागर की
पृष्ठभूमि और घटना का क्रम
एक 60 वर्षीय निवासी ने दार्जिलिंग‑गंगटोक टूर पैकेज बुक किया, जिसमें उनके वृद्ध माता‑पिता (79 व 81 वर्ष) और उनका कुत्ता शामिल था। पैकेज में आवास, भोजन, टैक्सी और होटल सुविधाएँ शामिल थीं, और कुल लागत ₹93,000 थी।
यात्रा के मध्य में एजेंसी ने बिना पूर्व सूचना के यात्रा‑सूची और होटल बदल दिया। नई होटल में पहुंचते ही कुत्ते के कारण ठहराव से इनकार कर दिया गया, जिससे परिवार को दुबारा दार्जिलिंग लौटना पड़ा और लगभग आठ घंटे का समय बर्बाद हुआ।
उपभोक्ता आयोग का फैसला
रोहतक उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (RCDRC) ने 17 अगस्त को जारी आदेश में कहा कि एजेंसी की लापरवाही ने पैकेज के मूल उद्देश्य—एक सुगम यात्रा—को नष्ट कर दिया। आयोग ने एजेंसी को ₹93,000 रिफंड, 9% वार्षिक ब्याज, ₹10,000 सेवा‑क्षति मुआवजा और ₹5,000 मुकदमे की लागत का भुगतान करने का निर्देश दिया।
अधिवक्ता जीवेश सैनी ने शिकायतकर्ता की ओर से अपील दायर की, जबकि एजेंसी ने ई‑मेल और व्हाट्सएप नोटिसों का जवाब नहीं दिया।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this ruling sets a precedent for travel providers to transparently disclose pet‑policy compliance and obtain explicit consent before altering itineraries, thereby safeguarding senior citizens and pet owners.
"Travel agencies must treat pet‑related requests with the same legal diligence as any other special accommodation," says consumer‑rights lawyer Ananya Mehta.
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या यात्रा पैकेज में पालतू जानवरों के लिए अलग से शुल्क लगता है?
उत्तर: अधिकांश पैकेज में पालतू‑शुल्क स्पष्ट रूप से उल्लेखित होना चाहिए; यदि नहीं, तो ग्राहक को लिखित पुष्टि लेनी चाहिए।
प्रश्न 2: उपभोक्ता को ऐसी स्थिति में कौन से अधिकार मिलते हैं?
उत्तर: रिफंड, मुआवजा, और न्यायिक खर्च वसूली का अधिकार है, साथ ही उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) से सहायता ली जा सकती है।