527‑527‑524‑522 अंक वाले चार छात्रों को EWS व SEBC आरक्षण के कारण सरकारी मेडिकल सीटें नहीं मिलीं। छह साल के मुकदमे के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को फीस के साथ 6% ब्याज भी लौटाने का आदेश दिया।
- 527‑527‑524‑522 अंक वाले चार NEET‑UG टॉपर्स को सरकारी सीटों से वंचित किया गया।
- महाराष्ट्र ने 10% EWS और SEBC आरक्षण के तहत एक‑बार निजी‑कॉलेज फीस पुनर्भुगतान योजना शुरू की।
- बॉम्बे हाई कोर्ट ने छह साल के मुकदमे के बाद राज्य को 6% साधारण ब्याज के साथ पूरी राशि लौटाने का आदेश दिया।
पृष्ठभूमि
2018‑19 में केंद्र ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) के लिए 10% आरक्षण लागू किया, जबकि महाराष्ट्र ने सामाजिक‑शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों (SEBC) एवं मराठा कोटा पेश किया। यह व्यवस्था सरकारी व सहायक मेडिकल कॉलेजों में 85% राज्य कोटा पर लागू हुई। चत्रपति संभाजीनगर के चार छात्रों ने अपने NEET‑UG अंक (527, 526, 524, 522) के आधार पर सरकारी सीटें माँगीं, परंतु आरक्षण के कारण उन्हें निजी कॉलेज में प्रवेश लेना पड़ा।
राज्य ने 20 सितंबर 2019 को एक सरकारी प्रस्ताव (GR) जारी किया, जिसमें कहा गया कि जिन छात्रों को EWS‑SEBC आरक्षण के कारण सरकारी/सहायक कॉलेज में प्रवेश नहीं मिला, उन्हें निजी कॉलेज की फीस का प्रतिपूर्ति किया जाएगा। लेकिन इन चार छात्रों को इस “एक‑बार” योजना से बाहर रखा गया, क्योंकि राज्य का तर्क था कि आरक्षण के बिना भी वे सरकारी कॉलेज में प्रवेश नहीं कर पाते।
क्यों यह महत्वपूर्ण है
BozokMedia का विश्लेषण दर्शाता है कि यह मामला केवल चार छात्रों की नहीं, बल्कि पूरे भारत में आरक्षण‑आधारित प्रवेश प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है। यदि मेरिट‑आधारित उम्मीदवारों को बिना स्पष्ट कारण के बाहर रखा जाता है, तो इससे न केवल व्यक्तिगत वित्तीय बोझ बढ़ता है, बल्कि उच्च शिक्षा के प्रति सार्वजनिक विश्वास भी धूमिल होता है।
“आरक्षण नीति का उद्देश्य सामाजिक न्याय है, न कि मेरिट को बलि देना।” – शिक्षा नीति विशेषज्ञ डॉ. रवींद्र सिंह
इतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में आरक्षण नीति की जड़ें 1950 के दशक तक जाती हैं, लेकिन 2019 में EWS कोटा जोड़ना पहला बड़ा बदलाव था। इस बदलाव ने कई राज्यों में मौजूदा SEBC व मराठा कोटा के साथ टकराव पैदा किया, जिससे कई कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या इस फैसले के बाद अन्य छात्रों को भी समान प्रतिपूर्ति मिल सकती है?
उत्तर: हाई कोर्ट ने कहा है कि समान परिस्थितियों वाले सभी छात्रों को समान अधिकार है, इसलिए समान मामलों में पुनर्भुगतान की संभावना है।
प्रश्न 2: राज्य को कितना ब्याज देना अनिवार्य है?
उत्तर: कोर्ट ने 6% साधारण ब्याज निर्धारित किया है, जो 2019‑2020 से लेकर भुगतान तक लागू होगा।