आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक जीवनभर की सजा काट रहे कैदी की पैरोल याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि विवाह का अधिकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा है, लेकिन यह जेल के नियमों और सुरक्षा को तोड़ने का अधिकार नहीं देता।
- आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने कैदी की शादी के लिए पैरोल की मांग को खारिज किया।
- अदालत ने कहा कि विवाह का अधिकार जेल से बाहर निकलने या जेल को शादी स्थल बनाने का अधिकार नहीं देता।
- कैदी का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड और जेल से भागने का इतिहास मुख्य कारण रहा।
आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि जीवनभर की सजा काट रहे एक कैदी के पास शादी करने का अधिकार तो है, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि उसे अपनी शादी के लिए जेल से बाहर आने की अनुमति दी जाए। न्यायमूर्ति सुनीता गंधम ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि विवाह का अधिकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता का एक पहलू है, लेकिन जेल के अनुशासन और सुरक्षा चिंताओं के कारण इस पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
यह मामला एक जीवनभर की सजा काट रहे कैदी की मां द्वारा दायर की गई याचिका से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने अपनी बेटी के साथ कैदी के विवाह के लिए 30 दिनों की पैरोल की मांग की थी। याचिका में यह भी सुझाव दिया गया था कि यदि पैरोल नहीं दी जा सकती, तो शादी को विशाखापत्तनम की केंद्रीय जेल के भीतर आयोजित किया जा सकता है या कैदी को मंदिर ले जाया जा सकता है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह फैसला जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था और कैदियों के मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन को रेखांकित करता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि 'पैरोल' कोई अधिकार नहीं बल्कि एक विशेषाधिकार है, जो केवल निर्धारित शर्तों को पूरा करने पर ही दिया जा सकता है।
विवाह का अधिकार व्यक्तिगत गरिमा का हिस्सा है, लेकिन यह जेल की सुरक्षा और अनुशासन को चुनौती देने का लाइसेंस नहीं है।
अदालत ने कैदी के पिछले आचरण पर गंभीर सवाल उठाए। रिकॉर्ड के अनुसार, यह कैदी 2014 में नेल्लोर की पुरानी केंद्रीय जेल से भाग गया था और 1,736 दिनों तक फरार रहने के बाद आत्मसमर्पण किया था। इसके अलावा, कैदी पर जेल के भीतर अनुशासनहीनता के लिए कई सजाएं भी दी गई थीं, जो पैरोल के लिए एक बड़ा कानूनी अवरोध हैं।
न्यायालय ने आंध्र प्रदेश निलंबन पैरोल नियम, 2024 का उल्लेख करते हुए कहा कि नियम परिवार के सदस्यों की शादी के लिए पैरोल का प्रावधान करते हैं, लेकिन कैदी की स्वयं की शादी को एक स्वतंत्र आधार के रूप में स्पष्ट रूप से मान्यता नहीं देते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. क्या शादी के लिए पैरोल मिलना एक अधिकार है?
नहीं, पैरोल एक विशेषाधिकार है जिसे जेल प्रशासन और नियमों के आधार पर दिया जाता है, यह कोई अनिवार्य अधिकार नहीं है।
2. अदालत ने जेल को शादी का वेन्यू बनाने से क्यों मना किया?
अदालत ने कहा कि एक उच्च-सुरक्षा वाली केंद्रीय जेल को निजी विवाह समारोह के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, क्योंकि इससे सुरक्षा व्यवस्था भंग हो सकती है।