दक्षिण दिल्ली के एक सेवानिवृत्त फौजी और उनकी पत्नी को 'डिजिटल अरेस्ट' कर जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल के नाम पर करोड़ों के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसाया गया और उनकी पूरी जमा पूंजी लूट ली गई।
- ठगों ने जेट एयरवेज संस्थापक नरेश गोयल के मनी लॉन्ड्रिंग मामले का इस्तेमाल जाल बिछाने के लिए किया।
- 78 वर्षीय सेवानिवृत्त फौजी और उनकी पत्नी को 48 घंटे तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा गया।
- पीड़ितों को फर्जी CBI अधिकारी बनकर डराया गया और 15.5 लाख रुपये की चपत लगाई गई।
- दिल्ली में वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाने वाले साइबर अपराधों में भारी वृद्धि देखी जा रही है।
दक्षिण दिल्ली के मुनिरका इलाके में रहने वाले एक 78 वर्षीय सेवानिवृत्त फौजी और उनकी पत्नी के साथ हुई घटना ने साइबर अपराधियों के नए और बेहद खतरनाक तरीके को उजागर कर दिया है। अपराधियों ने जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले का इस्तेमाल एक हथियार के रूप में किया, ताकि बुजुर्ग दंपत्ति को यह विश्वास दिलाया जा सके कि वे एक गंभीर अपराध में शामिल हैं।
घटना की शुरुआत एक साधारण बिजली बिल के कॉल से हुई। जब पीड़ित ने बिल भुगतान के बारे में पूछताछ करने के लिए दिए गए नंबर पर कॉल किया, तो उन्हें बताया गया कि उनका बैंक खाता नरेश गोयल के अवैध लेनदेन में शामिल है। इसके तुरंत बाद, उन्हें मुंबई में स्थित एक फर्जी CBI कार्यालय से वीडियो कॉल किया गया, जहाँ अपराधी खुद को DCP अनिल कुमार और SI विजय बताकर डरा रहे थे।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि साइबर अपराधी अब केवल तकनीकी खामियों का फायदा नहीं उठा रहे हैं, बल्कि वे मनोवैज्ञानिक युद्ध (Psychological Warfare) का सहारा ले रहे हैं। 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी तकनीकें बुजुर्गों के अकेलेपन और उनके डर का फायदा उठाती हैं, जिससे उन्हें सोचने का मौका ही नहीं मिलता।
'डिजिटल अरेस्ट' कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है; कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर किसी को हिरासत में नहीं रखती या पैसे की मांग नहीं करती।
अपराधियों ने दंपत्ति को डराने के लिए उनके घर के आसपास की तस्वीरें भी भेजीं, जो उन्होंने गूगल से डाउनलोड की थीं। अंततः, 'RBI सत्यापन' के नाम पर उन्हें अपनी पूरी बचत, यानी 15.5 लाख रुपये, स्थानांतरित करने के लिए मजबूर किया गया। पुलिस जांच में पता चला कि यह पैसा लुधियाना के एक खाते में गया, जिसे आगे टेलीग्राम के माध्यम से अन्य अपराधियों को बेच दिया गया था।
दिल्ली में वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ बढ़ते अपराधों का डेटा चिंताजनक है। NCRB के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली मेट्रो शहरों में वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ अपराधों के मामले में शीर्ष पर है। विशेष रूप से संपन्न इलाकों में रहने वाले बुजुर्ग, जिनके बच्चे अक्सर काम के सिलसिले में विदेश या अन्य शहरों में होते हैं, अपराधियों के आसान शिकार बन रहे हैं।
Frequently Asked Questions
1. क्या कोई सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी दे सकती है?
बिल्कुल नहीं। CBI, ED या पुलिस कभी भी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी या पैसे की मांग नहीं करती है।
2. अगर मेरे साथ ऐसी धोखाधड़ी हो जाए तो क्या करें?
तुरंत 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।