एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने गुंटूर नगर निगम में टेंडर प्रक्रिया में भारी अनियमितताओं का पता लगाया है, जिससे सरकारी खजाने को ₹1.18 करोड़ का नुकसान हुआ है। यह जांच 2017 से 2025 के बीच हुए कार्यों पर केंद्रित है।

  • एसीबी ने गुंटूर नगर निगम (GMC) में टेंडर प्रक्रिया में ₹1.18 करोड़ की वित्तीय अनियमितता का पता लगाया है।
  • जांच के दायरे में 2017-18 से 2024-25 के बीच किए गए 152 महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं।
  • एसीबी ने निगम कार्यालय में दो दिवसीय तलाशी अभियान चलाया और महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं।

एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गुंटूर नगर निगम (GMC) में टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा किया है। प्रारंभिक जांच के अनुसार, नगर निगम को पिछले कुछ वर्षों में लगभग ₹1.18 करोड़ का वित्तीय नुकसान हुआ है। यह घोटाला 2017-18 से लेकर 2024-25 के वित्तीय वर्ष के बीच किए गए विभिन्न नगर निगम कार्यों से संबंधित है।

एसीबी के गुंटूर डीएसपी टी.वी.वी. प्रताप कुमार ने मंगलवार को मीडिया को बताया कि निगम कार्यालय में दो दिवसीय गहन तलाशी अभियान के बाद यह निष्कर्ष निकला है। जांच दल ने शुरुआत में 156 कार्यों की पहचान की थी, जिनमें से डुप्लिकेट प्रविष्टियों को हटाने के बाद 152 कार्यों का विस्तृत परीक्षण किया गया।

जांच का विस्तार और संभावित बड़ा घोटाला

डीएसपी प्रताप कुमार ने स्पष्ट किया कि ₹1.18 करोड़ का आंकड़ा केवल एक प्रारंभिक अनुमान है। यह राशि केवल उन कार्यों पर आधारित है जिनका भुगतान पूरा हो चुका है। चूंकि कई अन्य अनुबंधों का भुगतान अभी भी लंबित है, इसलिए विस्तृत जांच के बाद कुल वित्तीय नुकसान का आंकड़ा काफी बढ़ सकता है।

एसीबी की टीम ने निगम कार्यालय से भारी मात्रा में रिकॉर्ड और दस्तावेज जब्त किए हैं। जांच के दौरान यह भी पाया गया कि कुछ महत्वपूर्ण टेंडर-संबंधी दस्तावेज निगम के पास उपलब्ध नहीं थे, जो जांच की दिशा में एक संदिग्ध पहलू हो सकता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि स्थानीय निकायों में टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी सीधे तौर पर जनता के करों (Taxpayers' money) की चोरी से जुड़ी है। गुंटूर का यह मामला अन्य नगर निकायों में भी इसी तरह के संगठित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है, जहाँ कागजी हेरफेर के जरिए सरकारी धन का गबन किया जाता है।

नगर निगमों में टेंडर प्रक्रियाओं की नियमित ऑडिटिंग न होना भ्रष्टाचार के लिए खाद-पानी का काम करता है।

एसीबी अब जब्त किए गए रिकॉर्ड्स का अपने कार्यालय में सूक्ष्म विश्लेषण करेगी। जांच का मुख्य उद्देश्य उन अधिकारियों और ठेकेदारों की पहचान करना है जो इस मिलीभगत में शामिल थे। लापता दस्तावेजों की खोज के लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं ताकि घोटाले की पूरी तस्वीर सामने आ सके।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत के विभिन्न राज्यों में नगर निकायों में टेंडर घोटाला एक पुरानी समस्या रही है। अक्सर 'बंडलिंग' (कई छोटे कार्यों को एक बड़ा कार्य बताकर देना) और 'कमीशनखोरी' के माध्यम से ठेके दिए जाते हैं, जिससे सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता गिरती है और सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ता है।

Did You Know?: टेंडर प्रक्रिया में 'मिलीभगत' (Collusion) का अर्थ है जब प्रतिस्पर्धी कंपनियां मिलकर कीमतें तय करती हैं ताकि सरकार को अधिक भुगतान करना पड़े।

Frequently Asked Questions

1. गुंटूर नगर निगम में कितना नुकसान हुआ है?
प्रारंभिक जांच के अनुसार ₹1.18 करोड़ का नुकसान हुआ है, लेकिन यह संख्या और बढ़ सकती है।

2. एसीबी की जांच किन वर्षों पर केंद्रित है?
जांच 2017-18 से लेकर 2024-25 के वित्तीय वर्षों के बीच हुए कार्यों पर केंद्रित है।