शिवगंगा जिले में आकाश डेलिसन की हिरासत में हुई संदिग्ध मौत के मामले में CB-CID ने बड़ी कार्रवाई करते हुए इंस्पेक्टर सहित छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। जांच में खुलासा हुआ है कि पुलिस ने घटना को छिपाने के लिए झूठी कहानी गढ़ी थी।
- आकाश डेलिसन की हिरासत में मौत के मामले में इंस्पेक्टर डलीपन सहित छह पुलिसकर्मियों पर हत्या का मामला दर्ज।
- CB-CID की चार्जशीट के अनुसार, पुलिस ने लोहे की रॉड से हमला किया और सबूत छिपाए।
- मृतक के शरीर पर 28 स्थानों पर चोटों के निशान पाए गए, जिससे पुलिस की 'पुल से गिरने' वाली थ्योरी खारिज हुई।
- आरोपियों पर SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।
तमिलनाडु के शिवगंगा जिले से एक हृदयविदारक मामला सामने आया है, जहाँ आकाश डेलिसन नामक एक अनुसूचित जाति (SC) के युवक की पुलिस हिरासत में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। CB-CID द्वारा दायर की गई चार्जशीट ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चार्जशीट में पुलिस इंस्पेक्टर डलीपन और पांच अन्य पुलिसकर्मियों को हत्या के आरोपी के रूप में नामित किया गया है।
मामले की शुरुआत 5 मार्च, 2026 को हुई थी, जब डेलिसन को मणमदुराई में एक विवाद के संबंध में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का प्रारंभिक दावा था कि डेलिसन गिरफ्तारी से बचने के लिए एक पुल से गिर गया था, जिससे उसे चोटें आईं। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और CB-CID की गहन जांच ने इस दावे की धज्जियां उड़ा दीं। शव परीक्षण में शरीर पर 28 अलग-अलग स्थानों पर चोट के निशान मिले, जो स्पष्ट रूप से बर्बरता की ओर इशारा करते हैं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यह मामला न केवल कानून प्रवर्तन एजेंसियों की जवाबदेही पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे हिरासत में हिंसा (Custodial Violence) को छिपाने के लिए आधिकारिक रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है। यह घटना राज्य की पुलिस व्यवस्था और दलित समुदायों की सुरक्षा के प्रति विश्वास को गहरा धक्का पहुँचाती है।
हिरासत में हिंसा के मामलों में पुलिस द्वारा साक्ष्यों को मिटाना और झूठी कहानियाँ गढ़ना न्याय प्रणाली के लिए एक गंभीर चुनौती है।
CB-CID की जांच में पाया गया कि पुलिसकर्मियों ने डेलिसन को मणमदुराई के पास एक नीलगिरी के बाग (eucalyptus grove) में ले जाकर लोहे की रॉड से बुरी तरह पीटा था। इस हमले के कारण डेलिसन के दाहिने पैर में फ्रैक्चर हुआ, जिससे अंततः उसकी रक्त वाहिकाओं में 'फैट एम्बोलिज्म' (fat embolism) हो गया और उसकी मृत्यु हो गई। चार्जशीट में यह भी उल्लेख किया गया है कि पुलिस ने हमले में इस्तेमाल की गई लोहे की रॉड को भी छिपा दिया था।
आरोपियों की सूची में इंस्पेक्टर डलीपन, सब-इंस्पेक्टर गुहान और कांस्टेबल कालेश्वरन, महेंद्रन, देवीतिरन और पलनियाप्पन शामिल हैं। इन सभी पर हत्या और SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत मामला दर्ज किया गया है। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने जानबूझकर डेलिसन की जाति को ध्यान में रखते हुए इस क्रूरता को अंजाम दिया।
Frequently Asked Questions
1. पुलिस ने डेलिसन की मौत का क्या कारण बताया था?
पुलिस ने दावा किया था कि डेलिसन गिरफ्तारी से बचने की कोशिश करते समय एक पुल से गिर गया था।
2. CB-CID की जांच में क्या मुख्य तथ्य सामने आए?
जांच में पाया गया कि पुलिस ने लोहे की रॉड से हमला किया था और चोटों के निशान छिपाने के लिए झूठी कहानी गढ़ी थी।