तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो (TGCSB) ने एक 85 वर्षीय सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी को डिजिटल अरेस्ट स्कैम के जरिए ठगे गए पूरे ₹85.20 लाख वापस दिलाने में सफलता प्राप्त की है। जालसाजों ने एनआईए अधिकारी बनकर बुजुर्ग को डराया और पैसे ऐंठ लिए थे।
- 85 वर्षीय सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी डिजिटल अरेस्ट स्कैम का शिकार हुए।
- जालसाजों ने खुद को एनआईए (NIA) अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर डराया।
- TGCSB ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ठगी गई पूरी राशि ₹85.20 लाख को फ्रीज करा दिया।
तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो (TGCSB) ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए, मलकजगिरी कमिश्नरेट के नेरेडमेट पुलिस स्टेशन क्षेत्र के एक 85 वर्षीय सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी से ठगे गए पूरे ₹85.20 लाख को सफलतापूर्वक बरामद कर लिया है। यह मामला एक बेहद सुनियोजित 'डिजिटल अरेस्ट' घोटाले का है, जिसमें अपराधियों ने पीड़ित को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर पैसे ऐंठ लिए थे।
घटनाक्रम के अनुसार, 21 अगस्त 2026 को पीड़ित को एक कॉल प्राप्त हुआ। कॉल करने वाले ने खुद को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) का अधिकारी बताया। जालसाज ने तेलुगु भाषा में बात की और वीडियो कॉल पर वर्दी पहने हुए दिखाई दिया, ताकि पीड़ित को विश्वास दिलाया जा सके कि वह वास्तव में एक सरकारी अधिकारी से बात कर रहा है।
कैसे हुआ यह बड़ा स्कैम?
धोखेबाज ने पीड़ित को डराते हुए दावा किया कि उनके आधार कार्ड का उपयोग 'अब्दुल सलाम' नामक व्यक्ति ने कर्नाटक और केरल में लगभग ₹2.50 करोड़ के अवैध लेनदेन के लिए किया है। अपराधी ने पीड़ित को गंभीर कानूनी कार्रवाई की धमकी दी और उन्हें सख्त निर्देश दिए कि वे इस बारे में किसी से भी बात न करें, अन्यथा पुलिस उनके घर पहुँच जाएगी जिससे उन्हें सामाजिक शर्मिंदगी झेलनी पड़ेगी।
डर के मारे, पीड़ित ने 'आरबीआई सत्यापन' (RBI verification) के नाम पर जालसाज द्वारा बताए गए बैंक खाते में ₹85,20,000 ट्रांसफर कर दिए। अपराधी ने आश्वासन दिया था कि यह राशि बाद में वापस कर दी जाएगी।
डिजिटल अरेस्ट एक मनोवैज्ञानिक युद्ध है जहाँ अपराधी कानून का डर दिखाकर पीड़ित की सोचने-समझने की शक्ति को खत्म कर देते हैं।
BozokMedia विश्लेषण: साइबर अपराधियों का नया तरीका
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि साइबर अपराधी अब केवल कॉल तक सीमित नहीं हैं; वे वीडियो कॉल के जरिए वर्दी का उपयोग करके और स्थानीय भाषाओं में बात करके लोगों का भरोसा जीत रहे हैं। यह मामला दर्शाता है कि कैसे 'डिजिटल अरेस्ट' की अवधारणा लोगों को पूरी तरह से नियंत्रित कर लेती है।
स्कैम का खुलासा तब हुआ जब जालसाज ने अतिरिक्त ₹42 लाख की मांग की। संदेह होने पर पीड़ित ने अपने बैंक से संपर्क किया और तुरंत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज कराई।
ऐतिहासिक संदर्भ: डिजिटल अरेस्ट का बढ़ता खतरा
पिछले कुछ महीनों में, 'डिजिटल अरेस्ट' के मामलों में भारत में भारी वृद्धि देखी गई है। इसमें अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई या एनआईए अधिकारी बताकर पीड़ित को घंटों तक वीडियो कॉल पर 'कैद' रखते हैं और उन्हें डराकर धन की मांग करते हैं।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: डिजिटल अरेस्ट स्कैम से कैसे बचें?
उत्तर: यदि कोई कॉल आपको डराए या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की बात करे, तो तुरंत कॉल काट दें और स्थानीय पुलिस को सूचित करें।
प्रश्न 2: यदि मैं ठगी का शिकार हो जाऊं तो क्या करूं?
उत्तर: तुरंत 1930 नंबर पर कॉल करें या NCRP पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करें।
| विशेषता | वास्तविक अधिकारी | साइबर अपराधी |
|---|---|---|
| संपर्क का माध्यम | आधिकारिक प्रक्रिया/पत्र | अचानक वीडियो कॉल/WhatsApp |
| पैसे की मांग | कभी नहीं करते | 'सत्यापन' के नाम पर मांगते हैं |
| गोपनीयता का दबाव | कानूनी प्रक्रिया का पालन | 'किसी को न बताएं' का दबाव |