केरल उच्च न्यायालय ने एक 50 वर्षीय महिला और 55 वर्षीय पति को आयु सीमा पार करने के बावजूद IVF उपचार जारी रखने की अनुमति दे दी है। अदालत ने यह निर्णय इसलिए लिया क्योंकि उनका उपचार 2013 में शुरू हुआ था जब वे कानूनी आयु सीमा के भीतर थे।
- केरल उच्च न्यायालय ने आयु सीमा के बावजूद IVF उपचार जारी रखने की अनुमति दी।
- जोड़े ने सभी चिकित्सा जोखिमों और देनदारियों को स्वीकार करने का नोटरीकृत हलफनामा देने पर सहमति जताई।
- अदालत ने पाया कि उपचार 2013 में शुरू हुआ था, जब दंपति कानूनी आयु सीमा के भीतर थे।
- यह निर्णय पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के एक समान मामले के मिसाल पर आधारित है।
केरल उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में एक 50 वर्षीय महिला और उनके 55 वर्षीय पति को सहायक प्रजनन तकनीक (ART) सेवाओं का लाभ उठाने की अनुमति दे दी है, भले ही उन्होंने Assisted Reproductive Technology (Regulation) Act, 2021 के तहत निर्धारित वैधानिक आयु सीमा को पार कर लिया हो। अदालत ने इस मामले में मानवीय और तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए दंपति को राहत प्रदान की है।
न्यायमूर्ति हरिसंकर वी मेनन की पीठ इस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें केंद्र सरकार, जिला कलेक्टर और राष्ट्रीय एवं केरल राज्य ART और सरोगेसी बोर्ड सहित कई पक्षों को चुनौती दी गई थी। मामले का मुख्य आधार यह था कि दंपति ने अपना IVF उपचार वर्ष 2013 में शुरू किया था, जो कि उस समय कानून द्वारा निर्धारित आयु सीमा के भीतर था।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह निर्णय उन दंपत्तियों के लिए एक बड़ी उम्मीद है जो लंबे समय से प्रजनन उपचार ले रहे हैं लेकिन नए कानूनों के कारण बीच में ही रुकने के जोखिम का सामना कर रहे हैं। यह फैसला स्पष्ट करता है कि यदि उपचार प्रक्रिया पहले से शुरू हो चुकी है, तो केवल आयु सीमा बढ़ने के आधार पर उसे बीच में रोकना अनुचित हो सकता है।
कानूनी मिसालें यह दर्शाती हैं कि प्रक्रियात्मक निरंतरता को व्यक्तिगत अधिकारों और पहले से शुरू किए गए चिकित्सा उपचारों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
अदालत ने दंपति को एक नोटरीकृत हलफनामा (notarised undertaking) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इस दस्तावेज़ के माध्यम से दंपति यह स्वीकार करेंगे कि वे इस प्रक्रिया से उत्पन्न होने वाले सभी जोखिमों, परिणामों और देनदारियों को स्वयं वहन करेंगे। अस्पताल ने पहले आयु सीमा का हवाला देते हुए प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया था, जिसे अदालत ने अब सुधारने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान, बचाव पक्ष के वकील ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के एक मामले (डॉ. पुष्पा बनाम भारत संघ) का हवाला दिया, जहाँ एक समान स्थिति में अदालत ने दंपति को उपचार जारी रखने की अनुमति दी थी। केंद्र सरकार ने आयु सीमा के नियमों में ढील देने का विरोध किया था, लेकिन अदालत ने मानवीय आधार और कानूनी समानता को प्राथमिकता दी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. क्या आयु सीमा बढ़ने पर IVF उपचार रोका जा सकता है?
सामान्यतः कानून के अनुसार आयु सीमा का पालन करना आवश्यक है, लेकिन यदि उपचार पहले से शुरू हो चुका है, तो न्यायालय हस्तक्षेप कर सकता है।
2. अदालत ने इस मामले में क्या शर्त रखी है?
अदालत ने दंपति को सभी चिकित्सा जोखिमों की जिम्मेदारी लेने के लिए एक नोटरीकृत हलफनामा देने का निर्देश दिया है।