राष्ट्रपति न्यायालय के कॉलेजियम को अब राजस्थान हाई कोर्ट के अस्थायी मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा द्वारा सुझाए गए चार नामों पर विचार करना होगा, जबकि इस प्रथा पर कानूनी बहस चल रही है।
- अस्थायी मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शर्मा ने चार हाई कोर्ट जजों के नाम प्रस्तावित किए हैं।
- कॉलेजियम के भीतर दो मतभेद: मेरिट‑आधारित विचार बनाम अस्थायी पद की लंबी अवधि को सामान्य बनाना।
- पिछले मामलों में समान परिस्थितियों में कॉलेजियम ने अलग‑अलग निर्णय लिए हैं।
नई दिल्ली – सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को अब राजस्थान हाई कोर्ट के अस्थायी मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा द्वारा भेजे गए कम से कम चार नामों पर विचार करना पड़ेगा, जैसा कि द इंडियन एक्सप्रेस को पता चला है। जस्टिस शर्मा सितंबर 2025 से लगभग एक साल से अस्थायी मुख्य न्यायाधीश के पद पर हैं, जिससे इस मुद्दे पर नई बहस छिड़ गई है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
परम्परागत रूप से अस्थायी मुख्य न्यायाधीशों को नियुक्तियों के लिए नाम सुझाने की अनुमति नहीं होती, क्योंकि उनका कार्यकाल छोटा होता है। हालांकि, 2020 में बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस धर्माधिकारी ने 22 नामों की सूची तैयार की थी, और 2022 में राजस्थान हाई कोर्ट के जस्टिस अकिल कुरेशी ने 12 नाम भेजे थे। इन मामलों में कॉलेजियम ने अलग‑अलग प्रतिक्रिया दी, जिससे इस प्रथा की वैधता पर सवाल उठे।
वर्तमान विवाद
कॉलेजियम के भीतर एक राय यह है कि अस्थायी मुख्य न्यायाधीश द्वारा भेजे गए नामों को केवल पदनाम के कारण अस्वीकार नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि उनके मेरिट पर मूल्यांकन होना चाहिए। दूसरी ओर, एक चेतावनी यह है कि यदि इस प्रथा को सामान्य किया गया तो अस्थायी पदों की लंबी अवधि को सामान्य माना जाएगा, जिससे स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति में देरी हो सकती है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that इस निर्णय का प्रभाव न केवल राजस्थान हाई कोर्ट की कार्यशैली पर पड़ेगा, बल्कि पूरे भारतीय न्यायिक नियुक्ति प्रणाली में precedent स्थापित करेगा, जिससे भविष्य में अस्थायी मुख्य न्यायाधीशों की भूमिका पुनः परिभाषित हो सकती है।
"न्यायिक नियुक्तियों में पारदर्शिता और मेरिट को प्राथमिकता देना चाहिए, चाहे पदनाम कुछ भी हो," कहा गया है वरिष्ठ न्यायशास्त्री प्रो. अजय सिंह ने।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या अस्थायी मुख्य न्यायाधीश को हमेशा नाम भेजने की अनुमति होगी?
उत्तर: वर्तमान में यह नियम नहीं है; यह प्रत्येक मामले में कॉलेजियम के निर्णय पर निर्भर करता है।
प्रश्न 2: इस निर्णय का केंद्र सरकार की नियुक्तियों पर क्या असर पड़ेगा?
उत्तर: यदि नाम मेरिट के आधार पर स्वीकार किए जाते हैं, तो केंद्र को नामों को वापस भेजने की संभावना कम होगी।