अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने नकली रक्तचाप (BP) की दवाओं के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जिसमें लगभग 15,000 नकली गोलियां मरीजों तक पहुंच चुकी हैं। इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है और आपूर्ति का मुख्य केंद्र लखनऊ पाया गया है।
- अहमदाबाद में लगभग 15,000 नकली 'Nicardia Retard 10' गोलियां बेची गईं।
- पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें लखनऊ के दो निवासी शामिल हैं।
- नकली दवाओं का नेटवर्क उत्तराखंड से शुरू होकर लखनऊ और फिर गुजरात तक फैला था।
- जांच के दौरान 1,200 नकली स्ट्रिप्स बरामद की गईं।
अहमदाबाद क्राइम ब्रांच और खाद्य एवं औषधि विभाग ने एक बड़े नकली दवा रैकेट का पर्दाफाश करते हुए Nicardia Retard 10 नामक रक्तचाप (BP) की नकली दवाओं के बड़े जखीरे को जब्त किया है। जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि पिछले चार महीनों में लगभग 1,500 स्ट्रिप्स (कुल 15,000 गोलियां) मरीजों को बेची जा चुकी हैं, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत घातक हो सकती हैं।
जांच में बड़े खुलासे
यह मामला अहमदाबाद के सैटेलाइट इलाके में स्थित Lilavati Pharmacy and Wellness Private Limited के खिलाफ मिली शिकायत के बाद शुरू हुआ। जांच में पाया गया कि नकली दवा की ये स्ट्रिप्स Parshva Medical Store के माध्यम से अहमदाबाद के विभिन्न मेडिकल स्टोरों तक पहुंचाई जा रही थीं। पुलिस ने इस मामले में औषधीय स्टोर से जुड़े Darshil Sanghvi और उत्तर प्रदेश के लखनऊ निवासी Devendra Yadav एवं Umang Rastogi को गिरफ्तार किया है।
जांचकर्ताओं के अनुसार, आरोपी दारशिल संघवी 18 प्रतिशत कमीशन के लालच में आकर यह जानते हुए भी नकली दवाएं बेच रहा था कि वे असली नहीं हैं। पुलिस ने बताया कि नकली दवाओं का यह अवैध कारोबार उत्तराखंड से शुरू होकर लखनऊ पहुंचा और वहां से गुजरात के विभिन्न शहरों जैसे सूरत, भावनगर, नडियाद और भुज में फैलाया गया।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि नकली दवाओं का यह नेटवर्क न केवल आर्थिक अपराध है, बल्कि यह सीधे तौर पर मानव जीवन के साथ खिलवाड़ है। बीपी जैसी गंभीर बीमारी की गलत दवा लेने से मरीजों की जान जा सकती है। यह घटना देश में फार्मास्युटिकल सप्लाई चेन की सुरक्षा और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
नकली दवाओं का बढ़ता कारोबार सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक 'साइलेंट किलर' की तरह है, जो सप्लाई चेन की खामियों का फायदा उठा रहा है।
अहमदाबाद मेट्रो कोर्ट ने आरोपियों को सात दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस अब उन निर्माताओं की तलाश कर रही है जिन्होंने इन दवाओं की पैकेजिंग और सीलिंग की है। चार अलग-अलग क्राइम ब्रांच टीमों को देशभर में इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश में लगाया गया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में नकली दवाओं (Counterfeit Drugs) का मुद्दा लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। पिछले कुछ वर्षों में, दवाओं की बढ़ती मांग और जटिल सप्लाई चेन ने जालसाजों को अवसर प्रदान किया है। सरकार अब 'ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया' (DCGI) के माध्यम से सख्त नियम लागू कर रही है ताकि नकली दवाओं के निर्माण और वितरण को रोका जा सके।
Frequently Asked Questions
1. गिरफ्तार किए गए आरोपी कौन हैं?
पुलिस ने दारशिल संघवी (पार्श्व मेडिकल स्टोर), देवेंद्र यादव और उमंग रस्तोगी को गिरफ्तार किया है।
2. यह नकली दवा कहां-कहां बेची गई थी?
यह दवा अहमदाबाद के अलावा सूरत, भावनगर, नडियाद और भुज जैसे शहरों में भी बेची गई थी।