कर्नाटक उच्च न्यायालय ने सर्फिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के निर्णय को बरकरार रखते हुए रमेश बुदिहाल को एशियाई खेलों के लिए मुख्य चयनकर्ता के रूप में शामिल करने से इनकार कर दिया है। हालांकि, अदालत ने चयन प्रक्रिया में खामियों के लिए फेडरेशन की कड़ी आलोचना की है।
- कर्नाटक उच्च न्यायालय ने रमेश बुदिहाल की याचिका को खारिज कर दिया।
- अदालत ने सर्फिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) की चयन प्रक्रिया को 'अवैध' और त्रुटिपूर्ण बताया।
- भविष्य में सुधार के लिए पूर्व सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश आर वी रवींद्रन की अध्यक्षता में एक जांच समिति गठित की गई है।
बेंगलुरु: कर्नाटक उच्च न्यायालय ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में सर्फिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के उस निर्णय को रद्द करने से इनकार कर दिया, जिसमें रमेश बुदिहाल को जापान में होने वाले एशियाई खेलों के लिए पुरुष सर्फिंग स्पर्धा में केवल पहले रिजर्व के रूप में चुना गया था। न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज ने याचिकाकर्ता को राहत देने से मना कर दिया, लेकिन चयन प्रक्रिया की गंभीर खामियों पर चिंता व्यक्त की।
चयन प्रक्रिया में विवाद का मुख्य कारण
यह विवाद तब शुरू हुआ जब 23 जून को SFI की कार्यकारी परिषद ने शिवराज बाबू को भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना। रमेश बुदिहाल, जिन्होंने 2025 एशियाई सर्फिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था, ने इस निर्णय को चुनौती दी थी। बुदिहाल का तर्क था कि एशियाई खेलों में भाग लेना जीवन में एक बार मिलने वाला अवसर है और गलत चयन के कारण उनकी वर्षों की मेहनत बेकार हो जाएगी।
मामले की गहराई में जाने पर पता चलता है कि फेडरेशन की अपील पैनल ने पहले ही निर्देश दिया था कि एक विशेष चयन समिति बनाई जाए जो एथलीटों के प्रदर्शन का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन करे। हालांकि, 20 और 21 जून को हुई बैठक में समिति के चार सदस्यों के बीच बुदिहाल और बाबू के पक्ष में वोट बराबर रहे, जिससे गतिरोध पैदा हो गया। इसके बाद, SFI की कार्यकारी परिषद ने पिछले प्रदर्शन के आधार पर निर्णय ले लिया, जिसे अदालत ने 'अवैध' माना।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल एक एथलीट के चयन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह खेल संघों की जवाबदेही और पारदर्शिता पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। जब सार्वजनिक कर्तव्य निभाने वाली संस्थाएं अपनी ही नीतियों का पालन करने में विफल रहती हैं, तो यह राष्ट्रीय स्तर के एथलीटों के भविष्य और देश की खेल प्रतिष्ठा को प्रभावित करता है।
"SFI जैसी सार्वजनिक संस्थाओं को कानून और अपनी स्वयं की चयन नीति के अनुसार कार्य करना चाहिए और इस तरह की खामियों की पुनरावृत्ति नहीं होने देनी चाहिए।" - न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज
भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) ने अदालत को सूचित किया कि चयनित खिलाड़ियों की सूची पहले ही ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया के पोर्टल पर अपलोड की जा चुकी है, जिसे अब बदला नहीं जा सकता। न्यायमूर्ति गोविंदराज ने मौखिक रूप से कहा कि खेल 19 सितंबर से शुरू हो रहे हैं, इसलिए अब कुछ नहीं किया जा सकता।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में खेल संघों के चयन को लेकर अक्सर कानूनी विवाद होते रहे हैं। अक्सर फेडरेशन की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता की कमी के कारण एथलीटों को अपने अधिकारों के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाना पड़ता है, जिससे खेल प्रतिभाओं का मनोबल प्रभावित होता है।
जांच समिति का गठन
भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए, अदालत ने पूर्व सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश आर वी रवींद्रन की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। यह समिति SFI की चयन नीतियों और कार्यकारी परिषद के निर्णयों की जांच करेगी। जांच रिपोर्ट फरवरी 2027 तक अदालत में जमा की जानी है।
Frequently Asked Questions
1. अदालत ने रमेश बुदिहाल को राहत क्यों नहीं दी?
अदालत ने कहा कि चयन प्रक्रिया में खामियां होने के बावजूद, खिलाड़ियों की सूची पहले ही आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड की जा चुकी है और खेल शुरू होने वाले हैं, इसलिए अब बदलाव संभव नहीं है।
2. जांच समिति का कार्य क्या है?
जांच समिति यह पता लगाएगी कि SFI ने अपनी चयन नीतियों का पालन क्यों नहीं किया और विशेष चयन समिति के सदस्यों का आचरण कैसा था।