मद्रास उच्च न्यायालय ने आवीन (Aavin) को कोडाइकनाल और ऊटी में स्वचालित दूध वेंडिंग मशीनों के उपयोग को लोकप्रिय बनाने का निर्देश दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य प्लास्टिक कचरे को कम करना और पर्यावरण के अनुकूल दूध वितरण को बढ़ावा देना है।

  • मद्रास उच्च न्यायालय ने आवीन (Aavin) को 'बटन पााल' (स्वचालित दूध वेंडिंग मशीन) प्रणाली को बढ़ावा देने का आदेश दिया है।
  • यह पायलट प्रोजेक्ट कोडाइकनाल और ऊटी (उधगमंडलम) में शुरू किया गया है।
  • नई मशीनों में टच स्क्रीन और UPI भुगतान की सुविधा है, जो पुराने सिक्का-संचालित मॉडल से बेहतर है।
  • इस पहल का लक्ष्य प्लास्टिक पाउच के उपयोग को कम करके पर्यावरण की रक्षा करना है।

मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड (TNCMPFL), जो आवीन (Aavin) ब्रांड का संचालन करता है, को एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। अदालत ने निर्देश दिया है कि कोडाइकनाल (डिंडीगुल जिला) और ऊटी (नीलगिरि जिला) में स्वचालित दूध वेंडिंग मशीन (AVM) प्रणाली, जिसे स्थानीय रूप से 'बटन पााल' के रूप में जाना जाता है, को व्यापक रूप से लोकप्रिय बनाया जाए।

न्यायमूर्ति एन. सतीश कुमार और न्यायमूर्ति के. राजशेखर की पीठ ने यह आदेश तब दिया जब आवीन के प्रबंध निदेशक अजय यादव ने अदालत में एक स्थिति रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट के अनुसार, कोडाइकनाल के थियागरराज सालई में 16 अगस्त, 2026 को और ऊटी के चारींग क्रॉस स्थित उझवर संधई में 17 अगस्त, 2026 को पहली मशीनों का उद्घाटन किया गया था।

तकनीकी प्रगति और वर्तमान स्थिति

अदालत को बताया गया कि ये नई मशीनें पुरानी सिक्का-संचालित मशीनों से काफी अलग हैं। Amici Curiae (न्यायालय के मित्र) द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इन आधुनिक मशीनों में टच स्क्रीन और QR कोड की सुविधा है, जो सीधे बैंक खातों से जुड़ी हैं। इससे उपभोक्ता UPI (Unified Payments Interface) के माध्यम से आसानी से भुगतान कर सकते हैं।

शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, कोडाइकनाल में प्रतिदिन लगभग 80 लीटर और ऊटी में 3 से 6 लीटर दूध की बिक्री देखी गई है। हालांकि यह संख्या अभी कम है, लेकिन प्रबंधन का मानना है कि जैसे-जैसे जागरूकता बढ़ेगी, मांग में वृद्धि होगी। बचा हुआ दूध निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार रीप्रोसेसिंग के लिए वापस डेयरी में भेज दिया जाता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कदम केवल दूध वितरण के बारे में नहीं है, बल्कि यह एक बड़े पर्यावरणीय सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। हिल स्टेशनों में प्लास्टिक पाउच का अत्यधिक उपयोग कचरा प्रबंधन के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

स्वचालित वेंडिंग मशीनों का पुनरुद्धार प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ एक प्रभावी हथियार साबित हो सकता है।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस पहल का उद्देश्य निवासियों को प्लास्टिक पाउच के बजाय अपने स्वयं के कंटेनरों में दूध खरीदने के लिए प्रोत्साहित करना है। इससे न केवल प्लास्टिक का कचरा कम होगा, बल्कि पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों की रक्षा भी होगी।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में 'बटन पााल' प्रणाली दशकों से लोकप्रिय रही है, लेकिन 2014 में पर्यावरणीय और तकनीकी कारणों से पुरानी सिक्का-संचालित मशीनों को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। अब, आधुनिक तकनीक के साथ इसका पुनरागमन हो रहा है।

Did You Know?: नई AVM मशीनें एक बार में 200 लीटर तक दूध स्टोर कर सकती हैं और पूरी तरह से डिजिटल भुगतान पर आधारित हैं।

Frequently Asked Questions

1. 'बटन पााल' प्रणाली क्या है?
यह स्वचालित दूध वेंडिंग मशीन (AVM) है जहां लोग अपने पात्रों में सीधे ताजा दूध प्राप्त कर सकते हैं।

2. यह पर्यावरण के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह दूध के लिए उपयोग होने वाले सिंगल-यूज प्लास्टिक पाउच की आवश्यकता को समाप्त करता है।