मदुरई, शिवगंगा और डिंडीगुल के हजारों लोग FQL निवेश ऐप के शिकार हुए हैं। मामले की गंभीरता और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को देखते हुए डीजीपी ने इसकी जांच आर्थिक अपराध विंग को सौंप दी है।
- FQL निवेश ऐप के जरिए ग्रामीण निवासियों को पैसा दोगुना करने का लालच दिया गया।
- ठगी में क्रिप्टो करेंसी (USDT और Binance) और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का उपयोग किया गया।
- मदुरई, शिवगंगा और डिंडीगुल जिलों के हजारों पीड़ित अब न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
तमिलनाडु के दक्षिणी जिलों में एक बड़े निवेश घोटाले ने तहलका मचा दिया है। FQL निवेश ऐप के माध्यम से हजारों लोगों को उनके पैसे दोगुना करने का झांसा देकर ठगा गया है। सोमवार को मदुरई कलेक्टरेट में आयोजित साप्ताहिक शिकायत बैठक में बड़ी संख्या में पीड़ितों ने अपनी याचिकाएं सौंपीं, जिससे इस घोटाले की भयावहता सामने आई है।
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, यह घोटाला मुख्य रूप से मदुरई के मेलुर और डिंडीगुल के नथम क्षेत्रों में केंद्रित था, लेकिन इसका प्रभाव शिवगंगा के सिंगमपुनारी और मदुरई के समयनल्लूर और अलंगनल्लूर तक फैला हुआ था। जालसाजों ने स्थानीय एजेंटों का एक नेटवर्क बनाया था, जिन्होंने ग्रामीण आबादी को निशाना बनाया।
ठगी का तरीका: विश्वास और धोखा
पीड़ितों के बयानों से पता चलता है कि जालसाजों ने बहुत ही सुनियोजित तरीके से लोगों का भरोसा जीता। मदुरई की पोथुमपोनु ने बताया कि उन्होंने अपने पति की सहमति के बिना 3 लाख रुपये निवेश किए, क्योंकि उनके पड़ोसियों को ऐप के माध्यम से भुगतान मिल रहा था। ऐप में निवेश की गई राशि अमेरिकी डॉलर में दिखाई देती थी, जिससे निवेशकों को यह विश्वास हो गया कि वे भारी मुनाफा कमा रहे हैं।
एक अन्य पीड़ित, नाची, जो एक दिहाड़ी मजदूर हैं, ने बताया कि स्थानीय एजेंटों (अरुण, रंजीत और सत्य) ने उन्हें एक मैरिज हॉल में बुलाकर विश्वास दिलाया कि यह सुरक्षित निवेश है। जब भुगतान में देरी हुई, तो उन्हें 'VG इन्वेस्टमेंट' नामक एक अन्य योजना में पैसा स्थानांतरित करने का झांसा दिया गया।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this is not just a local fraud but a sophisticated cyber-crime operation. The use of cryptocurrency wallets and simulated foreign calls indicates a professional syndicate designed to bypass traditional banking surveillance. This highlights a critical gap in digital literacy among rural populations who trust personal recommendations over official police warnings.
"The integration of crypto-assets like USDT makes these scams harder to track, necessitating specialized agencies like the Economic Offences Wing to trace the money trail across borders."
मामले की जटिलता को देखते हुए, डीजीपी महेश कुमार अग्रवाल ने सभी छह पंजीकृत मामलों को आर्थिक अपराध विंग (EOW) को स्थानांतरित करने का आदेश दिया है। पुलिस का मानना है कि इस नेटवर्क के पीछे अंतरराष्ट्रीय लिंक हो सकते हैं और इसमें भारी मात्रा में डिजिटल करेंसी का लेनदेन हुआ है।
Frequently Asked Questions
1. FQL निवेश ऐप क्या था?
यह एक फर्जी निवेश एप्लिकेशन था जिसने लोगों को कम समय में पैसा दोगुना करने का लालच देकर ठगा।
2. इस मामले की जांच अब कौन कर रहा है?
डीजीपी के आदेशानुसार, अब इस घोटाले की गहन जांच आर्थिक अपराध विंग (EOW) द्वारा की जा रही है।